एलपीजी गैस बॉटलिंग प्लांट के ट्रक ट्रांसपोर्टरों ने किया चक्का जाम

इंडियन गैस एजेंसियों पर आपूर्ति बाधित
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। अमौसी स्थित इंडियन ऑयल एलपीजी गैस बॉटलिंग प्लांट के ट्रक ट्रांसपोर्टरों ने मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर सुबह छह बजे से गैस सिलेंडरों की उठान बंद कर दी। ट्रकों का चक्का जाम होने से लखनऊ जिले की इंडेन गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित हो गई। ट्रांसपोर्टरों ने इंडियन ऑयल कंपनी पर टेंडर के समय किए गए वादे से मुकरने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वादे से कम काम दिए जाने से उनकी आमदनी काफी घट गई है, जबकि गाड़ियों के संचालन का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
ट्रांसपोर्टर राजू यादव, अतुल यादव, प्रमोद वर्मा, योगेश सिंह और प्रवीन यादव ने बताया कि वर्ष 2023 में हुए टेंडर के दौरान 15 ट्रांसपोर्टरों के करीब 206 ट्रक अमौसी स्थित इंडियन ऑयल एलपीजी गैस बॉटलिंग प्लांट में लगाए गए थे। टेंडर के दौरान कंपनी ने लखनऊ के अलावा बाराबंकी, फैजाबाद, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और सीतापुर सहित कुल 192 गैस एजेंसियों तक सिलेंडर पहुंचाने की जिम्मेदारी दी थी। इसके लिए कंपनी ने सभी ट्रकों को सालाना 38 करोड़ 80 लाख रुपये का काम देने का आश्वासन दिया था। ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि तब प्रति ट्रक करीब 2.45 लाख रुपए प्रतिमाह के काम का अनुमान होने पर उन्होंने अपनी गाड़ियां गैस प्लांट में लगाई थी।
लेकिन ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि करीब एक साल पहले कंपनी ने काम का दायरा घटाकर लखनऊ और बाराबंकी के कुछ हिस्सों की महज 80 गैस एजेंसियों तक सीमित कर दिया। इससे ट्रांसपोर्टरों को मिलने वाला काम घटकर 80 से 90 हजार रुपए प्रतिमाह रह गया। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उन्होंने टेंडर मिलने के बाद बैंकों से कर्ज लेकर ट्रक खरीदे थे। अब प्रत्येक ट्रक की करीब 50 हजार रुपए मासिक किस्त चुकानी पड़ रही है। इसके अलावा चालक का 15 हजार रुपए वेतन, लोडिंग-अनलोडिंग पर 15 हजार और डीजल पर करीब 40 हजार रुपए प्रतिमाह खर्च होता है।
ऐसे में उनकी कमाई से अधिक खर्च हो रहा है और किस्तें चुकाना भी मुश्किल हो गया है। ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए कई बार प्लांट मैनेजर, कंपनी के उच्च अधिकारियों, जिलाधिकारी और जिलापूर्ति अधिकारी से बातचीत की जा चुकी है। उनका आरोप है कि जिला प्रशासन की ओर से समाधान का प्रयास किए जाने के बावजूद कंपनी के अधिकारी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इससे सभी ट्रांसपोर्टर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इसी नाराजगी में मंगलवार सुबह से सिलेंडरों की उठान रोक दी गई। इसके चलते लखनऊ जिले की इंडेन गैस एजेंसियों तक सिलेंडर नहीं पहुंच सके और उपभोक्ताओं को आपूर्ति प्रभावित होने का सामना करना पड़ गया। ट्रांसपोर्टरों ने मांग की है कि टेंडर के समय तय किए गए कार्यक्षेत्र के अनुसार उन्हें दोबारा सभी जिलों की गैस एजेंसियों पर सिलेंडर पहुंचाने का काम दिया जाए।



