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UP Election 2027: अखिलेश के सॉफ्ट हिंदुत्व के बीच इमरान मसूद का ‘वंदे मातरम’ पर दोटूक बयान, बोले- गर्दन कटा दूंगा, लेकिन गाऊंगा नहीं!

UP Election 2027: अखिलेश के सॉफ्ट हिंदुत्व के बीच इमरान मसूद का ‘वंदे मातरम’ पर दोटूक बयान, बोले- गर्दन कटा दूंगा, लेकिन गाऊंगा नहीं!

Imran Masood Vande Mataram Statement: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर सियासी बहस तेज हो सकती है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने साफ कहा है कि वह राष्ट्रगीत का सम्मान करते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के कारण इसे पूरा नहीं गाएंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि वह देश के लिए अपनी जान देने को तैयार हैं, लेकिन अल्लाह के अलावा किसी की उपासना नहीं कर सकते। उनके इस बयान को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा बढ़ने की संभावना है।

‘मैं हिंदुस्तानी मुसलमान हूं’, इमरान मसूद का जवाब

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद से जब पूछा गया कि वह पहले हिंदुस्तानी हैं या मुसलमान, तो उन्होंने खुद को ‘हिंदुस्तानी मुसलमान’ बताया। इसके बाद जब उनसे राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर उनके पुराने बयान पर सवाल किया गया, तो उन्होंने अपने रुख में बदलाव से इनकार किया।

इमरान मसूद ने कहा कि उनका धर्म उन्हें पूरा वंदे मातरम गाने की इजाजत नहीं देता। उनके मुताबिक, वह अल्लाह के अलावा किसी अन्य की उपासना नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें वंदे मातरम से नहीं, बल्कि उसके कुछ शब्दों और धार्मिक अर्थों से आपत्ति है।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बनाने में जुटे हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की राजनीतिक रणनीति और कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन के संदर्भ में भी इस बयान को देखा जा सकता है।

‘वतन के लिए गर्दन कटा दूंगा, लेकिन वंदे मातरम नहीं गाऊंगा’

अपने रुख को स्पष्ट करते हुए इमरान मसूद ने कहा कि वह मातृभूमि के लिए अपनी जान तक देने को तैयार हैं। उन्होंने भारत माता की जय बोलने की बात भी कही, लेकिन साथ ही दोहराया कि वह वंदे मातरम का पूरा गायन नहीं करेंगे।

कांग्रेस सांसद के अनुसार, वह राष्ट्रगीत के दौरान खड़े होकर उसका सम्मान करेंगे। उन्होंने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सम्मान को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि वह जन गण मन गाते हैं, क्योंकि उन्हें यह याद है, जबकि वंदे मातरम के सभी अंश उन्हें याद नहीं हैं।

मसूद ने यह भी कहा कि वह किसी दूसरे व्यक्ति पर उसकी धार्मिक मान्यताओं के पालन का दबाव नहीं डालते, इसलिए उनसे भी अपनी धार्मिक मान्यताओं के विपरीत किसी पूजा-पद्धति का पालन करने की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

राष्ट्रगीत पर बयान, सियासत में उठ सकते हैं सवाल

इमरान मसूद ने 17 अगस्त 2026 को भी वंदे मातरम को लेकर इसी तरह का रुख सामने रखा था। उन्होंने कहा था कि वह राष्ट्रगीत के गायन के दौरान खड़े होकर सम्मान देंगे, लेकिन इसे स्वयं नहीं गाएंगे। अब उनके ताजा बयान से इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो सकती है।

हालांकि, उनके बयान को लेकर उठने वाले राजनीतिक सवालों के बीच राष्ट्रगीत के सम्मान, धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रीय प्रतीकों की भूमिका पर बहस भी महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते समय संबंधित निर्णयों और उनके वास्तविक दायरे को अलग से देखना जरूरी है।

2027 से पहले सपा-कांग्रेस के लिए क्या मायने?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित तालमेल को लेकर राजनीतिक अटकलें लगाई जाती रही हैं। ऐसे में इमरान मसूद का बयान विरोधी दलों को सपा-कांग्रेस की विचारधारा और राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके रुख को लेकर सवाल उठाने का अवसर दे सकता है।

अब देखना होगा कि इस बयान पर कांग्रेस नेतृत्व क्या प्रतिक्रिया देता है और दूसरे राजनीतिक दल इसे चुनावी बहस में किस तरह उठाते हैं। फिलहाल इमरान मसूद ने अपने रुख को स्पष्ट बताते हुए कहा है कि वह वंदे मातरम का सम्मान करेंगे, लेकिन इसे पूरा गाने के लिए तैयार नहीं हैं।

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