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विदेश में बैठा सरगना लखनऊ से चला रहा था फर्जी कॉल सेंटर

विदेश में बैठा सरगना लखनऊ से चला रहा था फर्जी कॉल सेंटर

लखनऊ से चलता था अमेरिकी नगरिको को ठगने का खेल

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। राजधानी में फर्जी साइबर ठगी के अड्डे पर बुधवार को दोपहर से शुरू हुई छापेमारी करीब 12 घंटे तक चलती रही, पुलिस ने विदेशी नागरिकों से साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर साइबर अपराध शाखा और साइबर थाने की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर पुलिस ने 27 लड़कियों समेत 119 लोगों को गिरफ्तार किया। मौके से 103 लैपटॉप, 177 मोबाइल फोन, 116 हेडफोन, 99 कंप्यूटर माउस, 111 चार्जर, आठ इंटरनेट राउटर, एक बायोमेट्रिक मशीन समेत बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण, फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए।

पुलिस आयुक्त लखनऊ अमरेंद्र सेंगर ने बताया कि यह गिरोह मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाता था। आरोपीत इंटरनेट के माध्यम से फोन कर खुद को बड़ी कंपनियों या अमेरिकी सरकारी विभागों का अधिकारी बताते थे। इसके बाद बैंक खाते, पहचान संबंधी दस्तावेज या धनराशि से जुड़ी समस्या का डर दिखाकर लोगों को झांसे में लेते थे। विश्वास में लेने के बाद उनसे उपहार कूपन, डिजिटल मुद्रा या अन्य माध्यमों से रकम वसूल ली जाती थी। जांच में सामने आया कि यह फर्जी कॉल सेंटर पूरी तरह सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था।

सबसे पहले लोगों को झूठे संदेश भेजे जाते थे कि उनके नाम का उपयोग किसी गंभीर अपराध में हुआ है। इसके बाद अलग-अलग टीमों के माध्यम से बातचीत कर उन्हें डराया जाता था और अंत में उनकी जमा पूंजी ठग ली जाती थी। पुलिस ने बताया कि गिरोह सीधे बैंक खातों में पैसा नहीं लेता था, बल्कि उपहार कूपन और डिजिटल मुद्रा के जरिए धन प्राप्त करता था, जिससे लेन-देन का पता लगाना मुश्किल हो जाता था। छापेमारी के दौरान बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में विदेशी नागरिकों का विवरण, बातचीत का तैयार मसौदा, फर्जी सरकारी आदेश, जांच रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। पुलिस ने ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार समेत कुल 119 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सभी के खिलाफ साइबर अपराध, धोखाधड़ी, जालसाजी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

पुलिस जांच में कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। फर्जी कॉल सेंटर में पूर्वोत्तर राज्यों के युवक-युवतियों की संख्या सबसे अधिक थी और उन्हें अंग्रेजी में बातचीत कर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने के लिए लगाया गया था। इस कॉल सेंटर का सालाना संचालन खर्च कई करोड़ रुपये था, जिसमें कर्मचारियों का वेतन, भवन का किराया और अन्य खर्च शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से अर्जित रकम हवाला के जरिए भारत लाई जाती थी। विदेश में बैठा सरगना लखनऊ से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था और डॉलर ऐप के माध्यम से धन का लेन-देन होता, इसी अप के जरिए पूरे ठगी का नेटवर्क चलाया जाता था। सम्मिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर यह फर्जी कॉल सेंटर करीब सात महीने से दिन-रात संचालित हो रहा था। यहां गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, नागालैंड, मणिपुर, दिल्ली समेत कई राज्यों के पढ़े-लिखे युवक-युवतियां कार्यरत थे। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के वित्तीय नेटवर्क, हवाला कनेक्शन और विदेश में बैठे सरगना तक पहुंचने के लिए जांच कर रही है।

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