सरकारी वकीलों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य नहीं

नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सरकारी वकीलों के लिए आधार आधारित
बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने के दिल्ली सरकार के अभियोजन निदेशालय के आदेश पर
रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन
की याचिका पर यह आदेश पारित किया है। केन्द्र सरकार ने दलील दी थी कि अभियोजन
अधिकारियों की जिम्मेदारियां केवल कार्यालय तक सीमित नहीं होती। उन्हें अदालतों में पेश होने
के साथ-साथ जेलों, पुलिस थानों व फॉरेंसिक साइंस लैब में भी जाना पड़ता है। ऐसे में तय
कार्यालयी समय के अनुसार हाजिरी दर्ज करने की अनिवार्यता उनके कामकाज में बाधा डाल
सकती है।
अभियोजन निदेशालय ने 5 अक्तूबर को जारी आदेश में मुख्य लोक अभियोजकों, अतिरिक्त
लोक अभियोजकों व सहायक लोक अभियोजकों को आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली
पर पंजीकरण कराने और रोजाना हाजिरी दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके लिए बायोमेट्रिक
मशीन या चेहरे की पहचान करने वाले मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाना था।आदेश में यह
भी कहा गया था कि निर्देशों का पालन नहीं करने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा
सकती है। दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस आदेश के साथ अनिवार्य बायोमेट्रिक
हाजिरी से जुड़े पहले के परिपत्रों को भी चुनौती दी थी। पीठ ने अब आधार आधारित बायोमेट्रिक
हाजिरी अनिवार्य करने वाले आदेश पर रोक लगाई गई है।



