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रोबोटिक सर्जरी में तेजी से बढ़ रहा भारत, दिल्ली-एनसीआर बना प्रमुख केंद्र

रोबोटिक सर्जरी में तेजी से बढ़ रहा भारत, दिल्ली-एनसीआर बना प्रमुख केंद्र

नई दिल्ली। भारत रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में तेजी से अपनी क्षमता
बढ़ा रहा है और दिल्ली-एनसीआर इस बदलाव का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। दिल्ली में
आयोजित सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी इंडिया 2026 के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने
बताया कि दिल्ली-एनसीआर में 39 अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी प्रणाली उपलब्ध हैं, जबकि 11
अस्पतालों में एक से अधिक प्रणालियां स्थापित हैं। वर्ष 2025 में क्षेत्र में रोबोट की सहायता से
होने वाली सर्जरी की संख्या बढ़कर 10,937 पहुंच गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में रोबोटिक सर्जरी की संख्या में पिछले कुछ वर्षों के
दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021 में यहां 2,257 रोबोटिक प्रक्रियाएं हुई थीं, जो 2022
में बढ़कर 3,594, वर्ष 2023 में 5,024 और वर्ष 2024 में 7,595 हो गईं। वर्ष 2025 में यह
संख्या 10,937 तक पहुंच गई। इस प्रकार चार वर्षों में रोबोटिक प्रक्रियाओं में लगभग पांच गुना
वृद्धि दर्ज की गई।

कई चिकित्सा क्षेत्रों में बढ़ा इस्तेमाल

रोबोटिक सर्जरी का उपयोग दिल्ली-एनसीआर में विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं में बढ़ रहा है।
वर्ष 2025 में लगभग 33 प्रतिशत रोबोटिक प्रक्रियाएं सामान्य शल्य चिकित्सा से जुड़ी गैर-कैंसर
संबंधी थीं। इसके बाद 30.2 प्रतिशत प्रक्रियाएं मूत्ररोग, 22.1 प्रतिशत स्त्रीरोग और लगभग 10
प्रतिशत सामान्य शल्य चिकित्सा से जुड़ी कैंसर संबंधी प्रक्रियाएं थीं। सिर एवं गर्दन, वक्ष तथा
हृदय संबंधी शल्य चिकित्सा में भी रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी इंडिया 2026 सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि रोबोटिक
तकनीक के विस्तार के साथ भारत में उन्नत, कम चीरे वाली और रोबोट की सहायता से होने
वाली शल्य चिकित्सा की क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। यह सम्मेलन इस दृष्टि से भी
महत्वपूर्ण है कि सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी की अंतरराष्ट्रीय बैठक पहली बार एशिया में
आयोजित की जा रही है।

भारत में भी तेजी से बढ़ा रोबोटिक सर्जरी का दायरा

भारत में रोबोट की सहायता से होने वाली शल्य चिकित्सा की संख्या में भी पिछले कुछ वर्षों में
उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में देशभर में 8,912 रोबोटिक
प्रक्रियाएं हुई थीं, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 44,857 हो गई। विशेषज्ञों का कहना
है कि यह वृद्धि देश में रोबोटिक शल्य चिकित्सा के लिए बढ़ती चिकित्सकीय विशेषज्ञता,
आधारभूत ढांचे और संस्थागत क्षमता को दर्शाती है।
सम्मेलन को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार
कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि भारत स्वास्थ्य सेवा में नवाचार के महत्वपूर्ण दौर से
गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक, कृत्रिम मेधा, डिजिटल स्वास्थ्य और रोबोटिक शल्य

चिकित्सा के तेजी से विकसित होते क्षेत्र भारत को भविष्य की तकनीक अपनाने के साथ-साथ
उसके विकास और नवाचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर देते हैं।

2030 तक वैश्विक नेतृत्व की संभावना

सफदरजंग अस्पताल के मूत्ररोग, रोबोटिक एवं गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ.
अनूप कुमार ने कहा कि भारत रोबोटिक शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण चरण में पहुंच
चुका है। उनके अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच देश में रोबोटिक प्रक्रियाओं की संख्या में
हुई तेज वृद्धि इस तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और चिकित्सकीय विशेषज्ञता के विस्तार को
दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल रोबोटिक तकनीक अपनाने वाले देशों में शामिल नहीं है,
बल्कि देश में ऐसा अनुभव, आधारभूत ढांचा और शल्य चिकित्सा क्षमता विकसित हो रही है,
जो भविष्य में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम बना सकती है। यदि
वर्तमान गति बनी रहती है तो वर्ष 2030 तक भारत रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व
की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

टेली-सर्जरी से दूर बैठे मरीजों तक पहुंचेगी विशेषज्ञता

रोबोटिक सर्जरी के बाद भारत अब रोबोटिक टेली-सर्जरी के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। इस
तकनीक के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सक दूर बैठे मरीजों की शल्य चिकित्सा करने में सक्षम
हो सकते हैं। हाल ही में नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के मूत्ररोग, रोबोटिक एवं गुर्दा
प्रत्यारोपण विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. अनूप कुमार ने गुरुग्राम से हैदराबाद स्थित अस्पताल
में 1,600 किलोमीटर से अधिक दूरी पर रोबोट की सहायता से एक जटिल पुनर्निर्माण शल्य
चिकित्सा की। इसे सरकारी संस्थान के चिकित्सक द्वारा मूत्ररोग क्षेत्र में भारत की पहली
रोबोटिक टेली-सर्जरी के रूप में बताया गया।
इस उपलब्धि की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने भी सराहना की। विशेषज्ञों के अनुसार,
टेली-सर्जरी के विस्तार से देश के छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों तक बड़े
चिकित्सा केंद्रों की विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

भारत-चीन के बीच भी हुआ टेली-सर्जरी प्रदर्शन

मैक्स अस्पताल, नई दिल्ली में न्यूनतम पहुंच, अत्यधिक वजन संबंधी शल्य चिकित्सा एवं
रोबोटिक शल्य चिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. विवेक बिंदल ने रोबोटिक्स क्षेत्र की कंपनी के
साथ भारत और चीन के बीच सीमा पार प्रत्यक्ष रोबोटिक टेली-सर्जरी का प्रदर्शन भी किया।
वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के चिकित्सकों ने चीन के चेंगदू में लगभग
5,000 किलोमीटर दूर स्थित रोबोटिक नियंत्रण प्रणाली का उपयोग करते हुए वास्तविक समय
में जटिल पूर्व-नैदानिक प्रक्रियाएं पूरी कीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की तकनीक भविष्य में दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों तक
विशेषज्ञ शल्य चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने में उपयोगी हो सकती है। इसके अतिरिक्त दूरस्थ
प्रशिक्षण, चिकित्सकीय मार्गदर्शन और विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग के लिए भी
टेली-सर्जरी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

साइबर सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी भी महत्वपूर्ण

रोबोटिक टेली-सर्जरी के विस्तार के साथ तकनीकी और चिकित्सकीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्न भी
महत्वपूर्ण हो गए हैं। वर्ष 2026 में प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय सहमति सिफारिशों में दूरस्थ रोबोटिक
शल्य चिकित्सा के लिए संपर्क व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, चिकित्सकीय प्रशिक्षण, विशेषज्ञों की
मान्यता, आपातकालीन तैयारी और नियामकीय आवश्यकताओं पर जोर दिया गया है। डॉ. विवेक
बिंदल इस अंतरराष्ट्रीय सहमति प्रकाशन के लेखकों में शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोबोटिक शल्य चिकित्सा का विस्तार केवल रोबोटिक प्रणालियों की
संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ प्रशिक्षित चिकित्सक, कुशल चिकित्सा
दल, सुरक्षित तकनीकी संपर्क, आपातकालीन व्यवस्था, उचित प्रशिक्षण और स्पष्ट चिकित्सकीय
मानक भी आवश्यक होंगे।
दिल्ली-एनसीआर में वर्ष 2025 के दौरान 10,937 रोबोटिक प्रक्रियाओं और 39 अस्पतालों में
रोबोटिक प्रणालियों की उपलब्धता ने इस क्षेत्र को देश में रोबोटिक शल्य चिकित्सा के प्रमुख
केंद्रों में स्थापित किया है। वहीं, देशभर में 44,857 रोबोटिक प्रक्रियाओं का आंकड़ा बताता है कि
भारत में इस तकनीक का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में
इस क्षमता को सुरक्षित, सुलभ और व्यापक चिकित्सा सेवाओं में बदलना भारत के लिए अगली
बड़ी चुनौती होगी।

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