उत्तराखंड पुलिस में 1600 पदों पर जल्द शुरू होगी भर्ती

देहरादून। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश पुलिस के जवानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने उत्तराखंड पुलिस की विभिन्न वर्दीधारी इकाइयों में रिक्त 1600 पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की बात कही। इसके अलावा देहरादून में पुलिसकर्मियों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल और मल्टी स्टोरी बैरक का निर्माण किया जाएगा। पुलिसकर्मियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए देहरादून स्थित पुलिस अस्पताल को भी अपग्रेड किया जाएगा।
बुधवार को देहरादून पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस और अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों को सम्मानित करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा, शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण है। जवान विषम परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं।
थानों का बजट चार से बढ़ाकर आठ करोड़ रुपये होगा
मुख्यमंत्री ने पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए थानों को जरूरी कार्यों के लिए मिलने वाले वार्षिक बजट को चार करोड़ से बढ़ाकर आठ करोड़ रुपये करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पुलिस थानों और चौकियों में कर्मचारियों की संख्या और व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। साथ ही पुलिस जांच को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के लिए विवेचकों को आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
प्रदेश के सभी पुलिस मॉडर्न स्कूलों को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जिला पुलिस चिकित्सालयों में उपचार की सुविधाएं बेहतर की जा रही हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए निशुल्क शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिसकर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की ड्यूटी में दबाव और तनाव अधिक रहता है। ऐसे में जवानों को तनावमुक्त रखने के लिए समय-समय पर मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में पुलिस आवास संतुष्टि दर 18 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे 30 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से पुलिस आवास बढ़ाने पर काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष 785 पुलिसकर्मियों को पदोन्नति दी गई है। नागरिक पुलिस में 1573 और पीएसी में 373 आरक्षियों की सीधी भर्ती की गई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में पुलिस की जिम्मेदारियां अधिक चुनौतीपूर्ण हैं। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के साथ चीन और नेपाल से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से भी राज्य की सीमाएं लगती हैं।
उन्होंने कहा कि समय के साथ अपराधों की प्रकृति बदल रही है। अब पुलिस के सामने नशे के बढ़ते नेटवर्क और डिजिटल दुनिया में होने वाले अपराधों से निपटने की चुनौती भी है। नशा विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। ऐसे में पुलिस को आधुनिक संसाधनों और बेहतर सुविधाओं से लैस करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में देशभर में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 154 जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। इनमें उत्तराखंड के तीन जवान भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शहीद जवानों का बलिदान हमेशा देशवासियों और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
"हर पुलिसकर्मी को उसके मेहनत और सेवा का उचित सम्मान मिले, इसके लिए इस साल 785 पुलिस कर्मियों को प्रमोशन दिया गया है. साथ ही नागरिक पुलिस में 1573 और पीएसी में 373 आरक्षियों की सीधी भर्ती की गई है. पुलिस की ड्यूटी में बहुत दबाव और तनाव रहता है, जिसका असर पुलिस कर्मियों के सेहत पर भी पड़ सकता है. ऐसे में सीएम ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से आग्रह किया कि पुलिस कर्मियों के लिए समय-समय पर तनाव दूर करने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए. ताकि जवान तनाव मुक्त होकर पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाहन कर सके।"



