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दिल्ली-देहरादून ग्रीन एक्सप्रेसवे के गुणवत्ता पर उठे सवाल, लोकार्पण के बाद छह महीने में ही बेदम हुआ 12 हजार करोड़ का कारीडोर हाईवे

दिल्ली-देहरादून ग्रीन एक्सप्रेसवे के गुणवत्ता पर उठे सवाल, लोकार्पण के बाद छह महीने में ही बेदम हुआ 12 हजार करोड़ का कारीडोर हाईवे

सुनील जायसवाल, बिहारीगढ़। 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बना दिल्ली-देहरादून ग्रीन एक्सप्रेसवे लोकार्पण के छह महीने के भीतर ही अपनी बदहाली को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल को इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर का लोकार्पण किया था, जिसे आधुनिक सुविधाओं और तेज यातायात के लिए तैयार किया गया था। अब कुछ  ही माह में सड़कें उखड़ने लगीं, जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए, सेफ्टी बैरियर गायब हो गए और लाइटें बंद पड़ी मिलीं। इससे एनएचएआई की निगरानी व्यवस्था की पोल खुल गई है। एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत उखड़ी हुई है और मरम्मत के लिए पैचवर्क किया जा रहा है। बरसात में गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। सवाल है कि नई सड़क में इतनी जल्दी मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ी? निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और तकनीकी निगरानी की जांच जरूरी है। सुंदरपुर क्षेत्र में फ्लाईओवर समेत कई जगहों पर सड़क किनारे बैरिकेडिंग लगी है। क्षतिग्रस्त हिस्सों के कारण वाहन निर्धारित लेन के बजाय बीच के मार्ग से गुजर रहे हैं। यदि सड़क असुरक्षित है तो स्थायी सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
मुख्य एक्सप्रेसवे के साथ सर्विस रोड की हालत और भी खराब है। गहरे गड्ढों में पानी भरने से दोपहिया चालकों के लिए जोखिम बढ़ गया है। गड्ढों से बचने में वाहन अनियंत्रित हो रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो रहा। निर्माण एजेंसी के बाद गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी एनएचएआई अधिकारियों की है। जवाबदेही तय होनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों में है। मौके पर नियमित निरीक्षण क्यों नहीं हो रहा? इस संबंध में हाईवे अथॉरिटी के अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन रिसीव करना भी जरूरी नहीं समझा, जिससे यह हाईवे भगवान भरोसे चलता नजर आ रहा है।
गणेशपुर से डाट काली मंदिर तक गायब मिले सेफ्टी बैरियर.. निगरानी पर सवाल
बिहारीगढ़। दिल्ली-देहरादून ग्रीन एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गणेशपुर से लेकर डाट काली मंदिर तक हाईवे के कई स्थानों पर सेफ्टी बैरियर और सुरक्षा उपकरण गायब मिले हैं। यदि उपकरण चोरी हुए हैं तो यह केवल चोरी नहीं, बल्कि हाईवे की निगरानी व्यवस्था की विफलता है। रात में पेट्रोलिंग के बावजूद उपकरण कैसे गायब हो रहे हैं, एनएचएआई और स्थानीय प्रशासन के पास इसकी मॉनिटरिंग का प्रभावी सिस्टम क्यों नहीं है, यह बड़ा सवाल है। सुरक्षा के मोर्चे पर भी हालात चिंताजनक हैं।  रात में पेट्रोलिंग के बावजूद उपकरणों का गायब होना केवल चोरी नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की विफलता है।

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