पितृ पक्ष अतीत से भविष्य को जोड़ने वाली जीवन-दृष्टि, पूर्वजों की विरासत को आचरण में उतारें: CM योगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पितृ पक्ष को भारतीय जीवन-दर्शन और संस्कारों से जोड़ते हुए प्रदेशवासियों से पूर्वजों के तप, त्याग और मूल्यों को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें अपने आचरण में उतारने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पितृ पक्ष अतीत से भविष्य को जोड़ने वाली ऐसी जीवन-दृष्टि है, जो हमें अपनी जड़ों, परंपराओं और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का बोध कराती है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के नाम लिखी अपनी पाती में कहा कि पितृ पक्ष पूर्वजों के तप और त्याग को याद करने का पर्व है। इस दौरान परिवार और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली पिछली पीढ़ियों के योगदान को स्मरण किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी सिर्फ विरासत को याद करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे अपने जीवन और व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है।
औरंगजेब-शाहजहां के प्रसंग का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में मुगलकाल के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि आगरा किले में औरंगजेब ने अपने जीवित पिता शाहजहां को पानी के लिए तरसाया था। मुख्यमंत्री के मुताबिक शाहजहां ने औरंगजेब को पत्र लिखकर भारतीय सनातन परंपरा की ओर ध्यान दिलाया था कि यहां दिवंगत पूर्वजों को भी जल अर्पित करने की परंपरा है।
इस प्रसंग के जरिए मुख्यमंत्री ने बुजुर्गों के सम्मान और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता के भारतीय संस्कार को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का हिस्सा है।
विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी
सीएम योगी ने कहा कि पिछली पीढ़ियों ने समाज और देश को जो कुछ दिया, उसे सुरक्षित रखना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है। हमारा धर्म है कि हम पूर्वजों से मिली विरासत को संरक्षित करें और आने वाली पीढ़ियों को उससे भी अधिक समृद्ध विरासत सौंपें।
मुख्यमंत्री की अपील ऐसे समय आई है, जब पितृ पक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों का स्मरण हमें अपने कर्तव्यों का बोध कराता है और परिवार, समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि पितृ पक्ष को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए बुजुर्गों के सम्मान, परिवार के संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारियों को मजबूत करने के अवसर के रूप में भी देखें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ा समाज ही भविष्य का मजबूत निर्माण कर सकता है। पूर्वजों के आदर्शों को जीवन में अपनाकर ही नई पीढ़ी को बेहतर दिशा दी जा सकती है।



