खराब सीरिंज से मरीजों की बढ़ी परेशानी, नमूने लेने में लैब कर्मियों के छूट रहे पसीने

नागरिक अस्पताल की प्रयोगशाला में मरीजों को दोबारा देना पड़ रहा नमूना, एक ही फोल्डर होने से बढ़ रही भीड़
कविता। फरीदाबाद
जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रयोगशाला संबंधी जांच के लिए इस्तेमाल हो रही सीरिंज की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार इस बार उपलब्ध कराई गई कई सीरिंज ठीक से काम नहीं कर रही हैं। सीरिंज से मरीज का नमूना लेते ही पीछे की ओर से खून निकलना शुरू हो जाता है। इससे न केवल नमूना लेने में परेशानी हो रही है, बल्कि कई बार मरीज को दोबारा सुई लगाकर नमूना लेना पड़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मरीजों और आसपास मौजूद लोगों के लिए भी संक्रमण और रक्त के संपर्क में आने का खतरा बना हुआ है।
जिला नागरिक अस्पताल की प्रयोगशाला में तैनात कर्मचारियों के अनुसार खराब सीरिंज के कारण रक्त का नमूना लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। सीरिंज में नमूना भरने के बाद उसके पिछले हिस्से से खून रिसने लगता है, जिससे कई बार लिया गया नमूना भी खराब होने की स्थिति पैदा हो जाती है। इसके बाद मरीज को दोबारा नमूना देने के लिए बुलाना पड़ता है।
फोल्डर पर बढ़ा दबाव
प्रयोगशाला कर्मियों के मुताबिक खराब सीरिंज के कारण अधिकतर नमूने लेने के लिए फोल्डर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। जिला नागरिक अस्पताल की प्रयोगशाला में फिलहाल एक ही फोल्डर उपलब्ध होने से नमूने लेने के लिए मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। जिन मरीजों का नमूना फोल्डर के माध्यम से लिया जाता है, उनके बाद अन्य मरीजों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है। इससे जांच प्रक्रिया धीमी हो रही है और मरीजों को अतिरिक्त समय देना पड़ रहा है। लैब तकनीशियनों का कहना है कि इस बार उपलब्ध कराई गई सीरिंज पहले की तुलना में खराब हैं। उनका कहना है कि सीरिंज में नमूना लेते ही पीछे से खून निकलने लगता है। इससे काम करने वाले कर्मचारियों के हाथ और कपड़े भी रक्त के संपर्क में आने की आशंका रहती है।स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी खतरा
प्रयोगशाला में रक्त के नमूने लेने वाले कर्मचारियों का कहना है कि सीरिंज से रक्त रिसने की समस्या केवल जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करती, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी परेशानी पैदा करती है। नमूना लेते समय रक्त बाहर निकलने से कर्मचारी के संपर्क में आने की आशंका रहती है। वहीं मरीजों को बार-बार सुई लगाने से उनकी परेशानी बढ़ रही है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच के लिए आने के बाद यदि खराब उपकरणों के कारण दोबारा नमूना देना पड़े तो परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को सीरिंज की गुणवत्ता की जांच कराकर खराब सामग्री को बदलने की आवश्यकता है, ताकि जांच प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके और मरीजों तथा स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।



