जिला स्वास्थ्य अधिकारियों हेतु ओरिएंटेशन-सह-सेंसिटाइजेशन कार्यशाला आयोजित

पायनियर संवाददाता। चंदौली
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, डॉ. परितोष मिश्रा के सहयोग एवं मार्गदर्शन में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन , उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी एवं पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आॅफ इंडिया के सहयोग एवं समन्वय से राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिला स्वास्थ्य अधिकारियों हेतु ओरिएंटेशन-सह-सेंसिटाइजेशन कार्यशाला का आयोजन जनपद चंदौली में किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जनपद स्तर पर राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के प्रति स्वास्थ्य अधिकारियों की समझ को सुदृढ़ करना तथा एचआईवी/एड्स की रोकथाम, जाँच, उपचार, देखभाल एवं सहायता से संबंधित सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देना रहा। कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की संरचना एवं उद्देश्यों, एचआईवी संक्रमण की वर्तमान स्थिति, एचआईवी की रोकथाम, जाँच एवं परामर्श, एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी सेवाओं, एसटीआई/आरटीआई प्रबंधन, तथा उच्च जोखिम समूहों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। साथ ही, जिला एवं सामुदायिक स्तर पर एचआईवी संबंधी सेवाओं की पहुँच, गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता बढ़ाने में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
इस कार्यशाला में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सा अधिकारियों एवं संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को एचआईवी/एड्स संबंधी सेवाओं के बेहतर समन्वय, समयबद्ध जाँच, उपचार से जुड़ाव तथा लक्षित समूहों तक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यशाला में जिला क्षय रोग अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी-एचआईवी/एड्स, डॉ. निधि टंडन , दीपक तिवारी, अवंतिका बाजपेयी तथा दिशा क्लस्टर से मंडल कार्यक्रम प्रबंधक मनीष कुमार सिंह ने रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रतिभाग किया। उन्होंने विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यशाला के माध्यम से जिला स्वास्थ्य अधिकारियों की क्षमता संवर्धन, विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने तथा राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। साथ ही एचआईवी/एड्स की रोकथाम, समयबद्ध जाँच, उपचार सेवाओं से जुड़ाव तथा उच्च जोखिम समूहों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना।



