बाढ़ग्रस्त गांवों में व्यवस्था पर उठे सवाल,सड़क पर उतरे सैकड़ों ग्रामीण

राशन-भोजन न मिलने पर फूटा गुस्सा,एसडीएम ने पांच घंटे में समाधान का दिया भरोसा
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। गोमती का जल स्तर लगातार बढ़ने से बीकेटी तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में हालत गंभीर होते जा रहे हैं। लासा, अकड़रिया खुर्द,बहादुरपुर,सुल्तानपुर समेत कई गावों में पानी घरों के अंदर तक प्रवेश कर गया|फसलों के जलमग्न होने के साथ ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। घरों से बाजार,स्कूल,अस्पताल और जरूरी कामों के लिए निकलने के लिए एकमात्र सहारा अब नाव ही बचा है| पानी के बीच बच्चों,महिलाओं और बुजुर्गों की आवाजाही ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है,प्रशासन ने प्रभावित गांवों में आवागमन के लिए नाव और स्टीमर लगाए हैं।

लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि लासा और अकड़रिया खुर्द के लिए नावें पर्याप्त नहीं हैं,नावों में पर्याप्त लाइफ जैकेट भी उपलब्ध नहीं हैं। छोटे-छोटे बच्चे और स्कूली छात्र-छात्राएं भी बाढ़ के पानी के बीच नाव से आवागमन कर रहे हैं। ऐसे में किसी हादसे की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। बाढ़ से घिरे ग्रामीणों के सामने सिर्फ आवागमन ही नहीं,बल्कि खाने-पीने और पशुओं के चारे का संकट भी गहरा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक प्रभावित इलाकों में राशन और भोजन की ठोस व्यवस्था नहीं की गई है|

व्यवस्थाओं से नाराज लासा और अकड़रिया खुर्द के सैकड़ों ग्रामीण गुरुवार दोपहर इटौंजा-माल मार्ग पर उतर आए और सड़क जाम कर दिया,इससे मार्ग पर आवागमन बाधित हो गया। सूचना पर इटौंजा थाना प्रभारी सोबरन सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया,लेकिन ग्रामीण तत्काल राहत और ठोस व्यवस्था की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद एसडीएम बीकेटी आकाश कुमार और तहसीलदार बीकेटी शरद कुमार सहित अन्य संबंधित उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और पांच घंटे में समस्याओं के निस्तारण का भरोसा दिया इसके बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया।
ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा लिखित मांग पत्र
ग्रामीणों ने अधिकारियों को एक लिखित प्रार्थनापत्र भी सौंपा। इसमें अकड़रिया खुर्द,अकड़रिया कलां,बहादुरपुर और सुल्तानपुर समेत बाढ़ प्रभावित गांवों में तत्काल राहत और सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। बाढ़ के कारण लोगों के सामने रहने,आवागमन और पशुओं को सुरक्षित रखने तक का संकट पैदा हो गया है। प्रार्थनापत्र में पशुओं को बांधने के लिए ऊंचे और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने,बाढ़ से नष्ट फसलों का नुकसान दिलाने,प्रभावित गांवो में बिजली की व्यवस्था कराने तथा पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की गई है,ताकि गांवों में जमा पानी निकल सके।



