आबे मेमोरियल कॉरिडोर नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम, बोले CM योगी- मोदी-आबे की दोस्ती विश्वास पर बनी

वाराणसी, 7 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर केवल जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की स्मृतियों को संजोने वाला स्थान नहीं है, बल्कि भारत-जापान की मित्रता, विश्वास और साझा विरासत का जीवंत प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने आबे मेमोरियल कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए “जीवंत क्लासरूम” बताया। उन्होंने कहा कि यहां आने वाला युवा यह सीख सकता है कि दूरदृष्टि रखने वाला एक नेता किस तरह दो देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि शिंजो आबे को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि भारत और जापान की मित्रता हर वर्ष और मजबूत होती जाए।
मोदी-आबे की मित्रता पद से नहीं, विश्वास से बनी
सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं की मित्रता पद के कारण नहीं, बल्कि विश्वास के आधार पर बनी थी। उन्होंने बताया कि 2007 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान उनकी शिंजो आबे से मुलाकात हुई थी।
योगी ने कहा कि दोनों नेताओं के राजनीतिक पद बदलते रहे, लेकिन उनकी मित्रता कायम रही। उनके मुताबिक, यही व्यक्तिगत विश्वास आगे चलकर भारत और जापान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का आधार बना।
रुद्राक्ष बना भारत-जापान दोस्ती का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि वाराणसी का रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर भी भारत और जापान की दोस्ती का प्रतीक है। जापान की ओर से काशी को मिले इस रुद्राक्ष में अब शिंजो आबे की स्मृतियों को भी संजोया गया है।
उन्होंने कहा कि आज जब अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में हितों को प्राथमिकता दी जाती है, ऐसे समय में बिना लाभ-हानि का हिसाब लगाए साथ खड़ा रहने वाला मित्र मिलना महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास पर आधारित साझेदारी बताया।
सेमीकंडक्टर से ग्रीन हाइड्रोजन तक पहुंची साझेदारी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत-जापान सहयोग अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। दोनों देशों की साझेदारी सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य के क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा, “जापान के पास टेक्नोलॉजी है और भारत के पास टैलेंट। जापान के पास अनुभव है और भारत के पास युवा ऊर्जा।” मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बढ़ते निवेश सहयोग का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि यामानाशी और उत्तर प्रदेश के बीच भी सहयोग बढ़ रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यीडा क्षेत्र में करीब 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित करने की योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जापान के पास प्रिसिजन है, जबकि उत्तर प्रदेश के पास बड़ा बाजार और स्केल है।
2027 में भारत-जापान संबंधों के 75 साल
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे। उनके मुताबिक, आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस अमृत पर्व की पहली भेंट है।
उन्होंने काशी और जापान के क्योटो के बीच समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों शहर अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा हैं और दोनों ने यह दिखाया है कि विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने जापानी प्रतिनिधिमंडल और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे का जापानी भाषा में स्वागत भी किया। उन्होंने वाराणसी को दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक बताते हुए जापानी मेहमानों का अभिनंदन किया और अंत में “अरिगातो गोजाइमासु” कहकर धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल, वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, विधायक सौरभ श्रीवास्तव समेत जापान से आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मौजूद रहे।



