मारुति सुजुकी ने मानेसर प्लांट में शुरू किया पहला ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र

- ग्रीन हाइड्रोजन मैन्युफैक्चरिंग में होगा इस्तेमाल
गुरुग्राम। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने ग्रीन एनर्जी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने हरियाणा के मानेसर स्थित अपने प्लांट में 300 केवी क्षमता वाले ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया है। यह मारुति का पहला ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र है।
मानेसर संयंत्र में तैयार होने वाली ग्रीन हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्लांट मानेसर फैसिलिटी में पैदा होने वाली सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने में मदद करेगा। अक्सर छुट्टियों के दौरान सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली उपयोग में नहीं आ पाती और बर्बाद हो जाती है। अब इसी अतिरिक्त सौर ऊर्जा से ग्रीन हाइड्रोजन बनाई जाएगी, जिसे स्टोर करके बाद में प्रोडक्शन प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट से मिले अनुभव के आधार पर कंपनी भविष्य में हरियाणा और गुजरात स्थित अपने सभी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना बना रही है।
पायलट प्रोजेक्ट पर मारुति सुजुकी इंडिया के एमडी एवं सीईओ हिसाशी ताकेउचि ने कहा कि हमारे 300 केवी ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट की शुरुआत भारत सरकार के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है। सोलर और बायोगैस के विस्तार और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्थापना के साथ, यह कदम स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की ओर हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हमारी प्रतिस्पर्धा केवल लागत और गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि उत्पादन के दौरान होने वाले सीओ2 उत्सर्जन पर भी निर्भर करेगी। हमारा लक्ष्य मैन्युफैक्चरिंग से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को मौजूदा 6.15 लाख टन से घटाकर वित्त वर्ष 2030-31 तक 2.66 लाख टन करना है। कंपनी अपने खरखौदा प्लांट में 10 टन प्रतिदिन क्षमता वाला बायोगैस संयंत्र भी लगा रही है, जो वित्त वर्ष 2026-27 के अंदर चालू हो जाएगा।



