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भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली पहले के मुकाबले अब अधिक सुलभ :राजनाथ

भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली पहले के मुकाबले अब अधिक सुलभ :राजनाथ

केजीएमयू के 22वें दीक्षांत समारोह सम्पन्न, रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत चिकित्सा अनुसंधान में नए मानक स्थापित कर रहा है

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि आज भारत की स्वास्थ्य प्रणाली पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर, आसानी से सुलभ, सस्ती, आधुनिक और जन-केंद्रित होकर उभरी है। लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारत की स्वास्थ्य प्रणाली पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर, सुलभ, सस्ती, आधुनिक और जन-केंद्रित होकर उभरी है। आज, भारत जीन थेरेपी, परमाणु चिकित्सा और अन्य आधुनिक प्रौद्योगिकियों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए स्वदेशी समाधान विकसित कर रहा है।
सिंह ने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत चिकित्सा अनुसंधान में नए मानक स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि केजीएमयू ने देश को अनेक ऐसे चिकित्सक दिए हैं, जिन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री और डॉ. बीसी रॉय पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया है। इस संस्थान से जुड़े लोगों ने सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है। सिंह ने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने हीमोफीलिया के इलाज के लिए एक स्वदेशी जीन थेरेपी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है।

पुणे के एक संस्थान के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए एक अत्याधुनिक नैनो मेडिसिन विकसित की है। उन्होंने कहा कि तीन दशकों के बाद, 2024 में भारत में पेनिसिलिन-जी का उत्पादन फिर से शुरू हो गया है और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना ने चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी विनिर्माण को नई गति दी है। रक्षा मंत्री ने बताया कि आज देश भर में लोगों को 19,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से बहुत सस्ती कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं मिल रही हैं। जिस माहौल में चिकित्सा क्षेत्र के लोग काम करते हैं उसका जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि चिकित्सा पेशा से जुड़े लोग अत्यधिक तनावपूर्ण माहौल में काम करते हैं, जो उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

हालांकि, अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ (सब सुखी हों) की कामना करने के बाद, हम ‘सर्वे सन्तु निरामया’ (सब स्वस्थ रहें) की कामना करते हैं।’ उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में पिछले नौ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सिंह ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले राज्य में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, आज पूरे प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं और दो ‘अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान’ (एम्स) भी कार्यरत हैं। उन्होंने कहा, इसका मतलब है कि उत्तर प्रदेश अब ‘एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य को पार कर गया है। सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तभी बेहतर हो सकती है जब पर्याप्त संख्या में चिकित्सक और विशेषज्ञ उपलब्ध हों। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, हमारी सरकार ने चिकित्सा शिक्षा का अभूतपूर्व विस्तार किया है।

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