ब्लैक पीक की चोटी पर लहराया लहित एनिमल वेलफेयर ग्रुप का बैनर

- 6,387 मीटर की ऊंचाई पर अजय रावत ने किया कालानाग का सफल आरोहण
- पर्वतारोहण के जरिए पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
उत्तरकाशी। हिमालय की दुर्गम ऊंचाइयों पर साहस और संकल्प का परिचय देते हुए पर्वतारोही अजय रावत ने 6,387 मीटर ऊंची ब्लैक पीक (कालानाग) चोटी पर सफल आरोहण किया। सात अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर पांच मिनट पर चोटी पर पहुंचने के बाद उन्होंने लहित एनिमल वेलफेयर ग्रुप का बैनर लहराकर पशु कल्याण, प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उनकी इस पहल ने पर्वतारोहण की उपलब्धि को एक सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए बेजुबान जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। लहित एनिमल वेलफेयर ग्रुप की जिला अध्यक्ष खुशी नौटियाल ने अजय रावत के इस प्रयास को समूह के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ब्लैक पीक जैसी ऊंची और चुनौतीपूर्ण चोटी पर समूह का बैनर लहराया जाना पशु कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण के अभियान के लिए उत्साह बढ़ाने वाला कदम है। इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक संदेश देने के साथ ही युवाओं को प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए आगे आने की प्रेरणा देती है।
खुशी नौटियाल ने बताया कि लहित एनिमल वेलफेयर ग्रुप में अधिकतर युवा और विद्यार्थी जुड़े हुए हैं। समूह के सदस्य सीमित संसाधनों के बावजूद घायल और असहाय पशुओं के बचाव, उपचार, टीकाकरण तथा पुनर्वास के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। समूह का उद्देश्य केवल पशुओं की मदद करना ही नहीं, बल्कि समाज में उनके प्रति करुणा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और जीव-जंतुओं की रक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। हिमालय की सुंदरता और प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखने के लिए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाना आवश्यक है। पर्वतारोहण जैसे साहसिक अभियानों के माध्यम से यदि पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंचता है, तो इससे समाज में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलती है। ब्लैक पीक की चोटी पर लहराया गया लहित एनिमल वेलफेयर ग्रुप का बैनर इसी सोच का प्रतीक बना। अजय रावत की इस उपलब्धि पर समूह के सदस्यों ने खुशी व्यक्त करते हुए उनके प्रति आभार जताया। समूह का मानना है कि प्रत्येक जीव के प्रति करुणा और प्रकृति के प्रति सम्मान ही संवेदनशील समाज की पहचान है। पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।



