545 डॉक्टरों के पद खाली, 52,942 मरीज रेफर - क्या कर रही है धामी सरकार?

RTI में खुलासा:
- प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 840 पद स्वीकृत हैं, काम सिर्फ 295 डॉक्टर कर रहे हैं। *545 पद खाली* पड़े हैं।
- सिर्फ CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) में 401 पदों में से 55 पर डॉक्टर हैं, 346 पद यानी 86% खाली हैं।
- सुविधाएं और डॉक्टर न होने से एक साल में 52,942 मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा।
मतलब पहाड़ में अगर किसी महिला को डिलीवरी के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ चाहिए, बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ चाहिए, एक्सीडेंट में एनेस्थीसिया वाला चाहिए - तो डॉक्टर ही नहीं है।
हाईकोर्ट भी सख्त:
इस पर नेशनल पब्लिक ट्रस्ट ने जनहित याचिका लगाई। कल 29 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को फटकार लगाई और 4 महीने में व्यवस्था सुधारने का आदेश दिया। सरकार ने कोर्ट में कहा है मार्च 2027 तक सारे पद भर देंगे।
सरकार की हकीकत क्या है?
- सरकार कह रही है 'यू कोट वी पे' योजना में 6 लाख तक सैलरी देंगे, फिर भी कोई पहाड़ चढ़ने को तैयार नहीं।
- अब सरकार आउटसोर्सिंग से डॉक्टर लाने की पॉलिसी बना रही है, यानी ठेके पर डॉक्टर।
आज कोई गर्भवती महिला, एक हार्ट का मरीज देहरादून-हल्द्वानी रेफर होकर रास्ते में दम तोड़ देता है, और सरकार मार्च 2027 का वादा दे रही है।
545 पद खाली रहना सिर्फ आंकड़ा नहीं, पहाड़ की जिंदगी से खिलवाड़ है।



