देहरादून अतिक्रमण से परेशान, क्या कर रही धामी सरकार

देहरादून आज राजधानी कम, अतिक्रमण की राजधानी ज्यादा बन गया है। पलटन बाजार से लेकर ISBT, राजपुर रोड से लेकर नेहरू कॉलोनी, सहस्त्रधारा रोड से लेकर क्लेमेंट टाउन तक - हर जगह फुटपाथ गायब है, नाले बंद हैं, सड़कें सिकुड़ गई हैं।
आम आदमी रोज जाम में फंसा है, पैदल चलने को जगह नहीं, बरसात में थोड़ी बारिश में पूरा शहर जलभराव से डूब जाता है, क्योंकि सारे नालों पर पक्का अतिक्रमण हो चुका है। और सरकार?
धामी सरकार सिर्फ चुनिंदा जगहों पर बुलडोजर चलाकर फोटो खिंचवा रही है। अभी-अभी नेहरू कॉलोनी में एक मजार तोड़ी, तो प्रेस रिलीज आ गई कि 603 संरचनाएं हटा दीं, पर जमीन पर हकीकत क्या है?
हकीकत ये है कि देहरादून के मुख्य बाजारों में अस्थायी अतिक्रमण वैसे का वैसा है। फड़-ठेली वालों से 250 रुपये का चालान काटकर खानापूर्ति हो रही है। बड़े भूमाफिया, जिन्होंने नाले और सरकारी जमीन पर शोरूम और अपार्टमेंट खड़े कर दिए हैं, उन पर कार्रवाई कहाँ है?
हाईकोर्ट को खुद कहना पड़ रहा है कि क्लेमेंट टाउन के नाले पर अतिक्रमण हटाओ, DM को 6 महीने का समय देना पड़ रहा है। इससे साफ है कि सरकार अपने आप कुछ नहीं कर रही, अदालत धक्का दे रही है तब जाकर फाइल हिल रही है।
गृह सचिव अब नया ट्रैफिक रोडमैप बना रहे हैं, 42 पार्किंग की बात हो रही है। पर सवाल सीधा है - जब सड़क ही अतिक्रमण में है तो ट्रैफिक प्लान कहाँ बनेगा? पहले सड़क खाली कराओ, फिर रोडमैप बनाओ।
देहरादून की जनता पूछ रही है - ये चुनिंदा कार्रवाई और आंकड़ों की बाजीगरी कब तक? पूरे शहर को अतिक्रमण से मुक्त कराने का ठोस प्लान धामी सरकार कब लाएगी?
समाधान क्या है?
- पूरे शहर का ड्रोन सर्वे करके नाले और सरकारी जमीन चिन्हित की जाए
- फुटपाथ को सख्ती से खाली कराया जाए और वेंडिंग जोन बनाए जाएं
- पार्किंग के लिए बहुमंजिला पार्किंग और MDDA की खाली जमीन का उपयोग हो
- अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में भेदभाव न हो, सबके लिए एक नियम
देहरादून को जाम सिटी बनने से बचाना है तो अतिक्रमण पर जीरो टॉलरेंस ही एकमात्र रास्ता है।



