यूपी की नई पहचान: जेवर में चिप, लखनऊ में AI और काशी में जापान से दोस्ती, टेक्नोलॉजी हब बनने की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की आर्थिक तस्वीर में तकनीक और विनिर्माण की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। जेवर में चिप निर्माण की प्रस्तावित इकाई, लखनऊ में आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी योजनाएं, नोएडा का तकनीकी इकोसिस्टम और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में प्रस्तावित जापान सिटी प्रदेश के औद्योगिक भविष्य की नई दिशा दिखाते हैं। काशी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन भी इसी व्यापक संदर्भ में भारत-जापान संबंधों और तकनीकी सहयोग की चर्चा को आगे बढ़ाता है।
योगी सरकार का जोर उत्तर प्रदेश को केवल बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि उत्पादन, तकनीकी सेवाओं और निर्यात के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने पर है। इस दिशा में आईटी निर्यात के आंकड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का विस्तार और विदेशी निवेश आकर्षित करने की पहल अहम मानी जा रही है।
पांच साल में दोगुने से ज्यादा हुआ आईटी निर्यात
वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का आईटी और आईटीईएस निर्यात 1,01,970 करोड़ रुपये दर्ज होने की जानकारी दी गई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा 48,004 करोड़ रुपये था। इस तरह पांच साल में निर्यात में 53,966 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।
सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया की इकाइयों से निर्यात 52,778 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि विशेष आर्थिक क्षेत्रों से निर्यात 49,192 करोड़ रुपये बताया गया है। दोनों क्षेत्रों में हुई वृद्धि प्रदेश के आईटी सेक्टर के विस्तार को रेखांकित करती है।
अब सरकार की योजना इस आधार को मजबूत करते हुए तकनीकी सेवाओं, डिजिटल कारोबार और उच्च मूल्य वाले उद्योगों में निवेश बढ़ाने की है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में मजबूत होती हिस्सेदारी
उत्तर प्रदेश को मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट का उत्पादन प्रदेश में होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इसे वर्ष 2030 तक दो लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया गया है।
जेवर में 3,706 करोड़ रुपये के निवेश वाली एचसीएल-फॉक्सकॉन चिप इकाई को इस रणनीति की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। सेमीकंडक्टर से जुड़े उद्योगों का विस्तार इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने की दिशा में अहम हो सकता है।
लखनऊ में AI और सेमीकंडक्टर पर फोकस
राजधानी लखनऊ को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी और कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी के केंद्र के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षा जताई गई है। सरकार का लक्ष्य 50 विश्वस्तरीय एआई स्टार्टअप खड़े करना है। वहीं एचसीएल आईटी सिटी के फेज-2 में करीब 500 करोड़ रुपये के निवेश से छह हजार प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
नोएडा पहले से ही आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। लखनऊ और अन्य शहरों में तकनीकी क्षेत्र का विस्तार होने से रोजगार के अवसर अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं। इससे प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर करियर बनाने के विकल्प मिलेंगे।
जापान सिटी और निवेश प्रस्तावों पर नजर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान और सिंगापुर दौरे के दौरान करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी दी गई। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 500 एकड़ में जापान सिटी विकसित करने की योजना जापानी कंपनियों के साथ आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास है। इन्वेस्ट यूपी के जापान डेस्क को मजबूत करने की पहल भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
काशी के रुद्राक्ष केंद्र में आबे मेमोरियल कॉरिडोर जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की स्मृति और भारत-जापान मैत्री का प्रतीक है। सांस्कृतिक रिश्तों के साथ व्यापार, तकनीक और निवेश में सहयोग बढ़ने से प्रदेश को लाभ मिलने की संभावनाएं हैं।
निवेश से रोजगार तक पहुंचना होगी असली कसौटी
उत्तर प्रदेश में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप और आठ यूनिकॉर्न होने का उल्लेख भी तकनीकी इकोसिस्टम के विस्तार की तस्वीर पेश करता है। इसके साथ 644 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर प्रस्तावों का जिक्र डिजिटल बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को दिखाता है।
हालांकि, निवेश प्रस्तावों और घोषित लक्ष्यों को वास्तविक उपलब्धियों में बदलने के लिए परियोजनाओं का समय पर पूरा होना, कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता और निर्यात बाजारों में प्रतिस्पर्धा जरूरी होगी। रोजगार के अवसर तभी स्थायी बनेंगे, जब निवेश उत्पादन और सेवाओं के नियमित संचालन में बदलेगा।
काशी से जेवर तक फैली उत्तर प्रदेश की टेक्नोक्रांति का असली लक्ष्य यही है—तकनीक, निवेश और स्थानीय प्रतिभा को जोड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना।



