सीमा की सुरक्षा पर खतरा! भारत-नेपाल सीमा जोड़ने वाली सड़क मौत का गड्ढा बनी, अफसर मस्त - ग्रामीण पस्त
2230 मीटर का नर्क - तिकुनिया से बनवीरपुर तक हर कदम पर मौत, मंत्री तक बने पर नहीं बनी सड़क

तिकुनिया/लखीमपुर-खीरी। एक तरफ केंद्र व प्रदेश सरकारें सीमावर्ती क्षेत्रों और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए करोड़ों रुपये के बजट का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ लखीमपुर खीरी जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे तिकुनिया से बनवीरपुर मार्ग (लंबाई लगभग 2230 मीटर) की बदहाली उन दावों की पोल खोल रही है। कागजों में विकास गुलाबी दिखाया जा रहा है, जबकि हकीकत में यह सड़क पिछले कई वर्षों से बदहाली पर आंसू बहा रही है।
हादसों को न्योता दे रहे जानलेवा गड्ढे
सामरिक और व्यापारिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील यह मार्ग आज राहगीरों के लिए मुसीबत का पर्याय बन चुका है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। बारिश में पूरी सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है। नेपाल सीमा तक पहुंचने का प्रमुख जरिया होने के बावजूद इसकी उपेक्षा सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास दोनों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।
हालांकि क्षेत्र से जनप्रतिनिधि सांसद से लेकर गृह राज्य मंत्री तक बन गए, किंतु बहरहाल रास्ते आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
जिला पंचायत और पीडब्ल्यूडी में फंसा पेंच
यह मार्ग अब तक समन्वय की कमी का शिकार बना हुआ है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी के अनुसार, शासन के पत्र संख्या 23-2099/198/2023-2 (दिनांक 2 जनवरी 2024) के तहत इस 2230 मीटर लंबे मार्ग का हस्तांतरण अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड-1, पीडब्ल्यूडी लखीमपुर खीरी को किया जा चुका है। अब चौड़ीकरण व मरम्मत की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है।
वहीं पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता अनिल यादव ने मामले की जानकारी न होने की बात कहकर प्रकरण दिखवाने का आश्वासन दिया, जबकि विभाग के जेई आरके नागर का कहना है कि सड़क का हस्तांतरण अभी प्रक्रिया में है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी!
सड़क की लगातार अनदेखी से गुस्साए ग्रामीण जगदीश, योगेश, रामकिशोर, राजेश आदि ने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तिकुनिया-बनवीरपुर मार्ग के चौड़ीकरण और नवनिर्माण का कार्य जल्द शुरू नहीं कराया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे।



