न जनाधार, न चुनावी आधार, फिर भी विधायक बनने को तैयार

चुनावी खुमार: जनाधार मुट्ठीभर, ख्वाब विधानसभा के; पीलीभीत में भावी विधायकों की बाढ़!
टिकट की दावेदारी से लेकर सोशल मीडिया पर शक्ति प्रदर्शन तक शुरू हुई सियासी कवायद
कोई खुद को भावी विधायक बता रहा तो कोई जातीय समीकरणों में तलाश रहा जीत का रास्ता
पीलीभीत। विधानसभा चुनाव 2027 में अभी वक्त है, लेकिन पीलीभीत की सियासत में विधायक बनने की महत्वाकांक्षा ने अभी से जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक जमीन भले ही कमजोर हो और इलाके में पहचान सीमित हो, मगर विधानसभा पहुंचने का सपना देखने वालों की कतार लंबी होती जा रही है। मोहल्लों और वार्डों की राजनीति करने वाले कुछ छुटभइये नेता अब सीधे विधानसभा की कुर्सी पर नजरें गड़ाए हैं।
टिकट की दावेदारी, समर्थकों की फौज और जीत के दावों के बीच जिले का सियासी माहौल अभी से दिलचस्प होने लगा है। चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी का अंदाज भी निराला है। कोई सुबह सोशल मीडिया पर जनसेवा का संकल्प दोहराता है तो कोई दिन में किसी छोटे-बड़े कार्यक्रम में फूल-मालाओं के साथ तस्वीर खिंचवाकर अपनी राजनीतिक सक्रियता का प्रचार करता नजर आता है। दो-चार परिचितों को साथ लेकर खिंचवाई गई तस्वीरों के साथ जनता के अपार समर्थन का दावा भी ठोक दिया जाता है।
सोशल मीडिया की इन तस्वीरों में समर्थकों का हुजूम दिखाई देता है, लेकिन जमीनी हकीकत कितनी मजबूत है, इसका हिसाब शायद ही किसी के पास हो। कुछ नेताओं का उत्साह तो इस कदर बढ़ा हुआ है कि उन्होंने अपने नाम के आगे ही भावी विधायक लिखना शुरू कर दिया है। कोई पार्टी के बड़े नेताओं से कथित नजदीकियों को टिकट की गारंटी बता रहा है तो कोई जातीय समीकरणों के सहारे अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटा है।
चुनावी गणित बैठाने और राजनीतिक जोड़-तोड़ के बीच कई चेहरे खुद को सबसे मजबूत प्रत्याशी साबित करने में लगे हैं। दिलचस्प यह है कि अभी न टिकट का फैसला हुआ है और न चुनावी बिगुल बजा है, लेकिन इनके सियासी ख्वाबों में जीत और शपथ ग्रहण तक की तस्वीर तैयार है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन नेताओं को अपने इलाके की समस्याओं और जनता के बीच सक्रियता के आधार पर पहचान बनानी चाहिए, वे वास्तव में कितना जनाधार रखते हैं।
बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती, मतदाताओं से संपर्क और क्षेत्रीय मुद्दों पर संघर्ष की कसौटी पर उतरने से पहले ही दावेदारी का शोर मचाया जा रहा है। फिलहाल जिले में भावी विधायकों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन असली राजनीतिक ताकत का पता चुनावी मैदान में ही चलेगा। 2027 में विधानसभा की दहलीज तक कौन पहुंचेगा, यह भविष्य के गर्भ में है। फिलहाल टिकट की पहली सूची ही कई दावेदारों के सियासी सपनों की असली परीक्षा साबित होने वाली है।



