अतीक के खौफ वाले कसारी-मसारी में अब बसेंगे गरीब! योगी का ऐलान—‘कृष्णपुरी’ बनेगा इलाका, 602 घरों का भूमि पूजन

प्रयागराज। कभी माफिया अतीक अहमद के रसूख से जोड़कर चर्चा में रहने वाले प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके की पहचान बदलने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि इस इलाके को अब ‘कृष्णपुरी’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर 602 आवासों के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना के जरिए गरीब परिवारों को घर उपलब्ध कराने के साथ इलाके में विकास को नई दिशा दी जाएगी। वहीं, नाम बदलने की घोषणा के बाद बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है।
अतीक के नाम से जुड़ी रही इलाके की चर्चा
कसारी-मसारी का नाम प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके परिवार से जुड़े घटनाक्रमों के कारण सुर्खियों में रहा है। अतीक अहमद पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे और उस पर अवैध वसूली समेत गंभीर आरोप लगे थे। उसके प्रभाव को लेकर स्थानीय राजनीति में भी लंबे समय तक चर्चा होती रही।
बताया जाता है कि इलाके की एक जमीन पर अतीक अहमद का अस्तबल था। अप्रैल 2023 में अतीक और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों को कसारी-मसारी के कब्रिस्तान में दफनाया गया। इन घटनाओं ने इस इलाके को अतीक अहमद से जुड़ी खबरों में प्रमुखता से बनाए रखा।
बीजेपी के मुख्य वक्ता राकेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि अतीक के खौफ के कारण उसके आवास पर पहुंचने के दौरान आसपास की दुकानों के शटर बंद हो जाते थे। पार्टी अब इसी इलाके में आवासीय परियोजना को माफिया के प्रभाव से बदलाव की मिसाल के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
602 आवासों से विकास की नई शुरुआत का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कसारी-मसारी को अब कृष्णपुरी के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के तहत 602 आवासों के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया है। सरकार के मुताबिक, माफिया से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों को आवास उपलब्ध कराने की दिशा में यह अहम कदम है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “कसारी-मसारी अब नहीं होगा, अब ये कृष्णपुरी के रूप में हम इसे विकसित करेंगे! कोई रियायत नहीं होगी, माफियामुक्त यूपी बनेगा, उसके परिणाम दिखाई दे रहे हैं।”
सरकार इस फैसले को केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं बता रही, बल्कि जमीन के इस्तेमाल में बदलाव और आम लोगों के लिए आवास उपलब्ध कराने की पहल के रूप में पेश कर रही है।
बीजेपी और सपा आमने-सामने
बीजेपी इस घोषणा को माफिया के पुराने प्रभाव से जुड़ी पहचान को पीछे छोड़कर विकास की नई शुरुआत के तौर पर देख रही है। पार्टी का कहना है कि माफिया से मुक्त कराई गई जमीन का उपयोग गरीबों के हित में होना चाहिए।
वहीं, समाजवादी पार्टी ने बीजेपी के इस कदम पर सवाल उठाए हैं। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने विरोधियों को माफिया और अपने समर्थकों को बाहुबली बताती है। उन्होंने 2027 में जनता की ओर से जवाब मिलने का दावा भी किया।
विकास परियोजना के साथ बढ़ी सियासी गर्मी
कसारी-मसारी को कृष्णपुरी के रूप में विकसित करने की घोषणा ने प्रयागराज में विकास और राजनीति, दोनों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ सरकार 602 आवासों के जरिए गरीब परिवारों को लाभ पहुंचाने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे नाम बदलने की राजनीति से जोड़ रहा है।
अब परियोजना के निर्माण और आवासों के आवंटन से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। इससे यह स्पष्ट होगा कि इस पहल का स्थानीय परिवारों को किस तरह लाभ मिलता है।



