हमें बांटने का काम किया जाएगा, लेकिन हमें बंटना नहीं है: पंकज चौधरी

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि गुर्जर समाज के मान-सम्मान को लेकर उनके मन में सदैव समाज को साथ लेकर चलने का भाव रहा है। हमें बांटने का काम किया जाएगा, लेकिन हमें बंटना नहीं है, क्योंकि एक रहने में ही हमारी ताकत है। जब मुट्ठी बनती है, तभी वह मजबूत होती है और अलग-अलग रहेगी, तो टूट जाएगी।
ये बातें पंकज चौधरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में कहीं। उन्होंने कहा कि भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने अंग्रेजों की 'फूट डालो, राज करो' की नीति से विभाजित भारत की 500 से अधिक रियासतों का विलय कराकर अखंड भारत का निर्माण किया। उन्हें 'सरदार' इसलिए कहा गया, क्योंकि वे लोगों, देश और पीढि़यों को जोड़ना जानते थे। भाजपा की डबल इंजन सरकारें सरदार पटेल से प्रेरणा लेकर उनके पदचिह्नों पर चल रही हैं।
चौधरी ने कांग्रेस पर सरदार वल्लभभाई पटेल की उपेक्षा करने और उनका अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 1946 में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव होना था और वही आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बनता। उन्होंने कहा कि 15 में से 12 प्रदेश कांग्रेस कमेटियों ने सरदार पटेल का नाम दिया था, जबकि नेहरू का नाम किसी भी प्रदेश कमेटी ने नहीं दिया। इसके बावजूद सरदार पटेल को पीछे हटना पड़ा, क्योंकि नेहरू जी दूसरे नंबर पर नहीं रहना चाहते थे। उन्होंने कहा था कि किसी भी तरह का जातीय और नस्लीय भेदभाव हमें नुकसान नहीं पहुंचा सकता। हम सब भारत के बेटे-बेटियां हैं और हमें अपने देश से प्रेम करना चाहिए। आज आवश्यकता है कि समाज को बांटने वाली सोच से दूर रहकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जाए।
चौधरी ने अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के 118 वर्ष पूरे होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। साथ ही, कहा कि गुर्जर, पटेल और कुर्मी समाज को एक मंच पर लाने की पहल सामाजिक-आर्थिक मजबूती का उदाहरण है। उन्होंने 1857 की क्रांति में कोतवाल धन सिंह गुर्जर द्वारा लगभग 850 स्वतंत्रता सेनानियों को आजाद कराने और विजय सिंह पथिक द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन को किसान संघर्ष व सामाजिक सुधार से जोड़ने में निभाई भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'आजादी का अमृत महोत्सव' के माध्यम से इन राष्ट्रनायकों को उनका वास्तविक सम्मान दिलाया गया।



