पांच लाख रुपए में हुआ था सौदा
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) परीक्षा के दौरान दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे परीक्षा देने पहुंचे एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामला महानगर थाना क्षेत्र स्थित आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज, बादशाह नगर के परीक्षा केंद्र का है। जहां बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, परीक्षा केंद्र संख्या (47118) पर प्रथम पाली की परीक्षा के दौरान केंद्र व्यवस्थापक डॉ ममता किरण राव ने ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों को सूचना दी कि अनुक्रमांक (0405065045) पर परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी अमरजीत सिंह की फिंगरप्रिंट और फेस आईडी का मिलान नहीं हो रहा है। सत्यापन में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थी को रोक लिया गया और पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।
केंद्र व्यवस्थापक की तहरीर पर महानगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।विवेचना के दौरान पता चला कि परीक्षा दे रहा व्यक्ति वास्तविक अभ्यर्थी नहीं, बल्कि मन्तेस सिंह पुत्र शीतला सिंह निवासी ग्राम शमशाबाद, थाना अहिरौला, जनपद आजमगढ़ था। वर्तमान में वह प्रयागराज के शिवकुटी क्षेत्र में रह रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि वह प्रयागराज निवासी अमरजीत सिंह पुत्र राधेश्याम के स्थान पर सामाजिक विषय की टीजीटी परीक्षा देने आया था। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने के लिए पांच लाख रुपए का सौदा तय हुआ था।
उसने यह भी बताया कि उसे अग्रिम धनराशि के रूप में पांच हजार रुपए मिल चुके थे। परीक्षा में शामिल होने के लिए उसने अमरजीत सिंह के नाम का फर्जी और कूटरचित आधार कार्ड तैयार कराया था। हालांकि परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक और फेस आईडी मिलान के दौरान उसकी पहचान उजागर हो गई और पूरा मामला सामने आ गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक फर्जी आधार कार्ड, प्रवेश पत्र की छायाप्रति, ओप्पो कंपनी का एक मोबाइल फोन तथा 1910 रुपये नकद बरामद किए हैं।
आरोपियों की हो रही जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठाने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इसके पीछे किसी सॉल्वर गैंग या संगठित नेटवर्क की भूमिका है। पुलिस अब वास्तविक अभ्यर्थी और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। इसके आलावा इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल और प्रतिरूपण के प्रयासों को उजागर किया है। हालांकि बायोमेट्रिक और फेस रिकॉग्निशन जैसी तकनीकों के कारण समय रहते फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया। जिससे परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रही।










