रामलीला सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं शिक्षाप्रद भी है: डा. अशोक दिवाकर

मानेसर में अखिल भारतीय रामलीला कमेटी की लीला में कही यह बात
गुरुग्राम। अखिल भारतीय रामलीला कमेटी मानेसर द्वारा राव किशन लाल सी. से. स्कूल मानेसर परिसर में रामलीला मंचन किया गया। रामलीला मंचन का शुभारंभ गणेश वंदना के साथ हुआ। सरस्वती वंदना राव किशन लाल सी. से. स्कूल मानेसर की छात्राओं द्वारा की गई। रामलीला के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश दिया गया कि अच्छाई पर हमेशा बुराई की जीत होती है।
रामलीला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि शिक्षाविद् डॉ. अशोक दिवाकर, गुरुग्राम महानगर संघ संचालक जगदीश, राकेश यादव, पार्षद मनोज यादव, पार्षद रामप्रकाश (राजदान), पार्षद सर्वेश यादव, दिनेश यादव रामपुरा, शेरसिंह नवादा अध्यक्ष बाबा न्यारम दास गौशाला मानेसर, दीपिका सी. से. स्कूल संचालक रामकंवर, भगवती विद्या मंदिर संचालक राकेश, रामानुजन स्कूल संचालक राकेश कुमार, राव किशन लाल सी.से. स्कूल मानेसर संचालक देवेन्द्र सिंह, अखिल भारतीय रामलीला कमेटी मानेसर से राममेहर, रत्नेश तिवारी, रत्न लाल यादव, सतीश यादव मौजूद रहे। अपने संबोधन में डा. अशोक दिवाकर ने कहा कि रामलीला सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह शिक्षाप्रद है। हर पात्र से हमें शिक्षा मिलती है।
भगवान राम का जीवन हमें मर्यादा में रहने का संदेश देता है। धर्म की पालना और आज्ञाकारी होने की शिक्षा देता है। इसलिए इसे गंभीरता से लेना चाहिए। रामलीला में नारदजी का कामदेव पर विजय और विजय से उत्पन्न अभिमान को भगवान विष्णु द्वारा चूर करना, राजा दशरथ द्वारा पुत्र प्राप्ति यज्ञ और राम लला, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के जन्म तक के प्रसंग का मंचन हुआ। रामलीला के संचालक राघवराम शर्मा ने बच्चों को रामलीला का प्रसंग दोहराया।



