फरियादियों की अनदेखी पड़ी भारी, पुलिस कमिश्नर ने एक झटके में लाइन हाजिर किए 12 दरोगा

आईजीआरएस और जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर गिरी गाज, विभागीय जांच के आदेश
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। राजधानी में पुलिस चौकियों और थानों पर फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों की सुनवाई में लापरवाही अब पुलिसकर्मियों को भारी पड़ने लगी है। जन शिकायतों और आईजीआरएस प्रकरणों के निस्तारण में सुधार न होने पर पुलिस कमिश्नर ने शनिवार को बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए 12 उपनिरीक्षकों और चौकी प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया। सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ तरुण गाबा ने कहा कि जन शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए पहले भी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि फरियादियों को थाने और चौकियों से निराश होकर न लौटना पड़े। शिकायतों को गंभीरता से सुनकर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ उनका समाधान किया जाए। इसके बावजूद आईजीआरएस और जन शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
सरकारी कामकाज में उदासीनता और लापरवाही सामने आने पर पुलिस आयुक्त ने सीधे कार्रवाई का रास्ता चुना।इस कार्रवाई की चपेट में गोमतीनगर के विवेक खंड, चिनहट के जलसेतु, गुडंबा के शिवानी विहार, आलमबाग के बस स्टैंड और मड़ियांव के नौबस्ता चौकी प्रभारी समेत 12 उपनिरीक्षक आए हैं। इसके अलावा बीकेटी, सुशांत गोल्फ सिटी, मोहनलालगंज, दुबग्गा, वजीरगंज, पारा और गौतमपल्ली थानों में तैनात उपनिरीक्षकों पर भी कार्रवाई की गई है।पुलिस कमिश्नर की इस कार्रवाई ने राजधानी की पुलिसिंग व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
आखिर फरियादियों की शिकायतों का समय पर निस्तारण क्यों नहीं हो रहा? चौकियों पर शिकायत लेकर पहुंचने वाले लोगों को बार-बार थानों और अधिकारियों के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं? क्या जवाबदेही सिर्फ चौकी प्रभारियों की है या उन थाना प्रभारियों की भी, जिनके अधीन इन चौकियों का संचालन होता है?हकीकत यह है कि कई बार फरियादी अपनी समस्या लेकर पुलिस चौकी पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित सुनवाई और समाधान नहीं मिल पाता। ऐसे में केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से व्यवस्था में स्थायी बदलाव आना मुश्किल है।
थाना प्रभारियों की निगरानी और जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।पुलिस कमिश्नर का यह कदम पुलिस महकमे के लिए स्पष्ट संदेश है कि वर्दी के साथ जिम्मेदारी भी निभानी होगी। यदि इसी तरह शिकायतों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई जारी रही और इसकी आंच लापरवाह पर्यवेक्षण अधिकारियों तक भी पहुंची तो राजधानी की पुलिसिंग में जवाबदेही की नई व्यवस्था बन सकती है। हालांकि असली परीक्षा तब होगी, जब थाने और चौकियों पर पहुंचने वाले आम फरियादियों को बिना सिफारिश, बिना दबाव और बिना चक्कर लगाए न्याय मिलने लगेगा।



