80 फीसदी से अधिक निवेश संपत्तियों का नहीं हो रहा आकलन

जलवायु जोखिम पर म्यूचुअल फंड कंपनियों की लापरवाही
संजय कुमार मेहरा
गुरुग्राम। देश के म्यूचुअल फंड उद्योग में ईएसजी और जिम्मेदार निवेश के दावों की पोल खुल गई है। देश की 80 फीसदी से अधिक म्यूचुअल फंड संपत्तियों का प्रबंधन करने वाली 12 बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियां अब तक अपने निवेश पोर्टफोलियो का जलवायु जोखिम आकलन नहीं कर रही हैं।
लगातार दूसरे साल सभी 12 कंपनियों को जलवायु परिदृश्य विश्लेषण में शून्य अंक मिले हैं। क्लाइमेट रिस्क होराइजन्स की रिस्किंग अल्फा-2 रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 12 में से 10 कंपनियों ने अपने समग्र स्कोर में सुधार किया है, लेकिन जलवायु जोखिम के मोर्चे पर स्थिति जस की तस है। यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी 12 अंकों के साथ पहले और एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट 11 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एचडीएफसी, निप्पॉन लाइफ इंडिया, कोटक महिंद्रा और डीएसपी एसेट मैनेजर्स 10-10 अंकों के साथ संयुक्त तीसरे स्थान पर रहे। एक्सिस, मिराए एसेट, टाटा और बंधन ने भी तीन-तीन अंकों का सुधार किया।
रिपोर्ट में सेबी से ईएसजी फंडों के लिए स्पष्ट नियम बनाने और निवेश से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का खुलासा अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट की लेखिका स्नेहा यादव ने कहा कि ईएसजी फंडों को स्पष्ट बताना चाहिए कि वे कोयला खनन और कोयला आधारित बिजली उत्पादन जैसी गतिविधियों को किस सीमा तक निवेश से बाहर रखते हैं।
रिपोर्ट ने सवाल खड़ा किया है कि जब कंपनियां अपने निवेश का जलवायु जोखिम ही नहीं माप रहीं, तो निवेशकों को जिम्मेदार निवेश की पूरी तस्वीर कैसे मिलेगी।
रिपोर्ट में कोयला निवेश को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। किसी भी एएमसी ने सभी योजनाओं पर लागू होने वाली स्पष्ट कोयला नीति सार्वजनिक नहीं की है। सात कंपनियां ईएसजी या स्थिरता आधारित फंड चला रही हैं, लेकिन इनमें से तीन की योजनाओं में कोयला गतिविधियों से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। कोटक महिंद्रा ने अपनी एक श्वस्त्र योजना में कोयला बहिष्करण का उल्लेख किया है, लेकिन उसमें एनटीपीसी की हिस्सेदारी भी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी कंपनी ने अपने निवेश पोर्टफोलियो से जुड़े कार्बन उत्सर्जन का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया है।



