माया राजेश्वरन रेवती ने चेन्नई ओपन के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर भारतीय महिला टेनिस में नया इतिहास रचा
वह 2012 के बाद डब्ल्यूटीए टूर स्तर की एकल प्रतियोगिता के अंतिम आठ में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले यह उपलब्धि दिग्गज सानिया मिर्जा ने फरवरी 2012 में पटाया ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर हासिल की थी।

- चेन्नई ओपन में इतिहास रचने के बाद भी माया का फोकस बरकरार, बोलीं- खेल में सुधार ही सबसे बड़ा लक्ष्य
चेन्नई । भारतीय महिला टेनिस की उभरती खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने चेन्नई ओपन में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने के बावजूद अपना ध्यान पूरी तरह खेल पर केंद्रित रखा है। 17 वर्षीय माया का मानना है कि सफलता और पहचान जरूरी हैं, लेकिन असली लक्ष्य लगातार बेहतर प्रदर्शन करना और अपने खेल में सुधार करना है।
माया ने बुधवार को चेन्नई ओपन के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर भारतीय महिला टेनिस में नया इतिहास रचा। वह 2012 के बाद डब्ल्यूटीए टूर स्तर की एकल प्रतियोगिता के अंतिम आठ में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले यह उपलब्धि दिग्गज सानिया मिर्जा ने फरवरी 2012 में पटाया ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर हासिल की थी।
विश्व रैंकिंग में 669वें स्थान पर काबिज माया ने दूसरे दौर में पोलैंड की क्वालीफायर वेरोनिका फाल्कोव्स्का (विश्व रैंकिंग 277) को सीधे सेटों में 6-4, 6-3 से हराया। चेन्नई ओपन के पिछले दो संस्करणों में कोई भी भारतीय खिलाड़ी दूसरे दौर से आगे नहीं बढ़ सकी थी।
इस ऐतिहासिक जीत के बाद माया ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के करियर में पहचान और प्रशंसा अहम भूमिका निभाती है। भारत जैसे देश में खिलाड़ियों को मिलने वाली पहचान महिला टेनिस को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनने में मदद कर सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पूरा ध्यान अपने प्रदर्शन और खेल से सीखने पर है।
माया ने स्वीकार किया कि फाल्कोव्स्का के खिलाफ मुकाबले में उनका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ नहीं था। विशेष रूप से सर्विस में उन्हें परेशानी हुई, जबकि पोलिश खिलाड़ी के आक्रामक रिटर्न ने भी चुनौती बढ़ाई। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के अनुसार खेल में बदलाव किया और अहम अंक हासिल कर जीत दर्ज की।
कोयंबतूर की इस युवा खिलाड़ी ने कहा कि वह जीत से खुश हैं, लेकिन पिछले दौर की तुलना में उनका खेल बेहतर था। प्रतिद्वंद्वी के आक्रामक अंदाज के सामने उन्होंने सही जगह शॉट लगाने और अधिक से अधिक गेंदों को अंक में बदलने की रणनीति अपनाई।
माया की इस सफलता के पीछे उनका लगातार मेहनत से भरा सत्र भी रहा है। जूनियर प्रतियोगिताओं के साथ-साथ वह पेशेवर टेनिस सर्किट में भी अपनी पहचान बना रही हैं। इस साल पेशेवर खिताब जीतने का लक्ष्य रखने वाली माया ने नाइजीरिया के लागोस में आईटीएफ प्रतियोगिता जीतकर अपना उद्देश्य पूरा किया।
आगे की योजनाओं के बारे में उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका लक्ष्य अधिक से अधिक मुकाबले खेलना और साल का समापन अच्छे प्रदर्शन के साथ करना है। वह रैंकिंग और बड़ी उपलब्धियों को लेकर अतिरिक्त दबाव नहीं लेना चाहतीं।
जूनियर ग्रैंडस्लैम में उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिलने पर भी माया का नजरिया सकारात्मक है। उनका मानना है कि हार खेल का हिस्सा है और हर मुकाबले से कुछ नया सीखने को मिलता है। पुरानी हार के बारे में सोचते रहने के बजाय आगे बढ़ना और अपनी कमजोरियों पर काम करना ज्यादा जरूरी है।
माया का यह आत्मविश्वास और परिपक्व सोच भारतीय महिला टेनिस के लिए उत्साहजनक संकेत है। चेन्नई ओपन में उनकी ऐतिहासिक सफलता ने जहां नई उम्मीद जगाई है, वहीं अब उनकी नजरें अपने प्रदर्शन को अगले स्तर तक ले जाने पर टिकी हैं।



