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हरित पहल: अब यूपी की सड़कों पर दौड़ेंगी हाइड्रोजन बसें

हरित पहल: अब यूपी की सड़कों पर दौड़ेंगी हाइड्रोजन बसें

-प्रत्येक हाइड्रोजन बस में होंगी 42 सीटें, एक बार में 750 किमी. की यात्रा, प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन भी

पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में इले्ट्रिरक बसों के साथ 3 हाइड्रोजन बसों को भी हरी झंडी दिखाई। यह पहल प्रदेश को हरित परिवहन की दिशा में आगे ले जाएगी। इससे प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा।

एनटीपीसी दादरी द्वारा विकसित ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना के तहत इन बसों का निर्माण किया गया है। ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है। डीजल व पेट्रोल आधारित वाहनों की तुलना में हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल हैं। इन बसों से उत्सर्जन के रूप में केवल पानी निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या नहीं होती। यही कारण है कि दुनिया के विकसित देश भी हाइड्रोजन आधारित परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं और अब उत्तर प्रदेश भी इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाता दिखाई देगा।

हर साल एक हजार टन कार्बन उत्सर्जन होगा कम
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के जल का उपयोग किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। साथ ही प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा, जो लगभग 1750 पेड़ लगाने के बराबर है। इसके अलावा इस परियोजना से प्रति वर्ष करीब 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।

एक बार में 750 किमी तक यात्रा संभव
42 यात्रियों की क्षमता वाली प्रत्येक बस में एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी, जिससे लगभग 750 किलोमीटर तक की यात्रा संभव होगी। ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह परियोजना न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि भविष्य के हरित परिवहन मॉडल का भी मार्ग प्रशस्त करेगी।

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