दून अस्पताल के डॉक्टरों ने बचाई तीन मरीजों की जान

देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों ने त्वरित उपचार और जटिल सर्जरी कर तीन गंभीर मरीजों की जान बचाई। इनमें सांस की नली में नुकीली कील फंसने वाली तीन साल की बच्ची, श्वास नली में प्लास्टिक का टुकड़ा फंसने वाला छह वर्षीय बच्चा और गले पर कांच से गहरा घाव लगने के कारण अत्यधिक रक्तस्राव से जूझ रही 35 वर्षीय महिला शामिल हैं। डॉक्टरों की टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सफल उपचार कर तीनों मरीजों को नया जीवन दिया।
तीन घंटे की सर्जरी कर बच्ची की सांस की नली से निकाली कील
उत्तर प्रदेश के धामपुर की रहने वाली तीन साल की बच्ची खेलते समय लोहे की नुकीली कील निगल गई थी। कील सांस की नली में फेफड़ों के पास काफी गहराई तक फंस गई थी। इसके बाद बच्ची को लगातार खांसी और सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन उसे उपचार के लिए दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने करीब तीन घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद सांस की नली से कील को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। उपचार के बाद बच्ची की हालत सुरक्षित बताई गई है और वह खतरे से बाहर है।
इस ऑपरेशन में डॉ. पीयूष त्रिपाठी, डॉ. प्रियंका चमोली, डॉ. उत्कर्ष जैन, डॉ. शैलेंद्र सिंह रावत, डॉ. सबा परवीन, डॉ. अंशुला उनियाल और डॉ. प्रियंका पांडेय शामिल रहे। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. इशिता बहुखंडी और डॉ. त्रिलोक तथा नर्सिंग स्टाफ से आशा किरण ने भी सहयोग दिया।
ब्रोंकोस्कोपी से निकाला बच्चे की सांस की नली में फंसा प्लास्टिक
दून अस्पताल के ईएनटी विभाग ने एक ही रात में दो अन्य गंभीर मरीजों का सफल उपचार किया। पहले मामले में खेलते समय छह वर्षीय बच्चे की सांस की नली में प्लास्टिक का टुकड़ा फंस गया था। डॉक्टरों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ब्रोंकोस्कोपी की मदद से प्लास्टिक के टुकड़े को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय पर उपचार मिलने से बच्चे को राहत मिली।
कांच से गले पर गहरा घाव, सर्जरी कर महिला की बचाई जान
इसी रात 35 वर्षीय महिला को गले पर कांच से गहरा घाव लगने के बाद अस्पताल लाया गया। महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था, जिससे उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। ईएनटी विभाग की टीम ने तत्काल उपचार करते हुए सर्जरी की और महिला की जान बचाई।
इन दोनों मामलों में ईएनटी विभागाध्यक्ष एवं मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. डॉ. रवींद्र सिंह बिष्ट के नेतृत्व में डॉ. शीबा राणा, डॉ. हिमानी शर्मा, डॉ. आशना पंत, डॉ. अनुराग सिंह, डॉ. गीतांजली और डॉ. प्रियंका पांडेय ने उपचार किया। एनेस्थीसिया टीम से डॉ. निधि गुप्ता, डॉ. मेघा कंवल और डॉ. ज्योति माथुर ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. आरएस बिष्ट ने डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीम को सफल उपचार के लिए बधाई दी। अस्पताल की टीम की त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय से तीनों गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिल सका।



