कभी दहेज हत्या और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में रहा निक्की भाटी हत्याकांड अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। जिस मामले ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था, उसी केस में अब दोनों परिवारों के बीच समझौता हो गया है। पंचायत के जरिए हुए इस फैसले के बाद इलाके में चर्चा और बहस का दौर तेज हो गया है। कई लोग इसे बच्चों के भविष्य के लिए लिया गया फैसला बता रहे हैं, तो कुछ इस पर सवाल भी उठा रहे हैं।
पूरा मामला उत्तर प्रदेश के Greater Noida के सिरसा गांव का है। 21 अगस्त 2025 को निक्की भाटी की बहन ने ससुराल पक्ष के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि निक्की के पति विपिन भाटी, सास दया, ससुर सत्यवीर और जेठ रोहित भाटी ने मिलकर उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।
मामला सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिला था। पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ने के बाद मुख्य आरोपी पति विपिन भाटी को 23 अगस्त 2025 को कथित मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सास दयावती, ससुर सत्यवीर और जेठ रोहित भाटी को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
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अब इस केस में नया मोड़ तब आया, जब करीब 20 दिन पहले दोनों परिवारों के बीच पंचायत हुई। निक्की के पिता भिखारी सिंह के मुताबिक, पंचायत में सबसे ज्यादा चिंता निक्की के बच्चों के भविष्य को लेकर जताई गई। लंबे विचार-विमर्श के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से समझौते का रास्ता चुना।
सूत्रों के अनुसार, समझौते के तहत निक्की के बच्चों के नाम संपत्ति करने और उनके पालन-पोषण के लिए आर्थिक सहायता देने पर सहमति बनी है। इसके अलावा निक्की की बहन कंचन को दोबारा उसके ससुराल भेजने पर भी परिवारों के बीच सहमति बनने की बात सामने आई है।
परिवार का कहना है कि अब वे अदालत में एफिडेविट दाखिल कर केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। हालांकि यह मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है और अंतिम फैसला न्यायालय के स्तर पर ही लिया जाएगा।
इस समझौते के बाद इलाके में लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि बच्चों के भविष्य और दोनों परिवारों के रिश्तों को देखते हुए यह व्यावहारिक फैसला है। वहीं कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि हत्या जैसे गंभीर मामले में पंचायत और समझौते के जरिए मामला खत्म करने की कोशिश कितनी उचित है।
फिलहाल निक्की भाटी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि समझौते के बाद उठ रहे कानूनी और सामाजिक सवाल हैं।










