आईपीएल 2026 में कई टीमों के कप्तानों की रणनीति और नेतृत्व पर सवाल उठे, जिनमें कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के कप्तान अजिंक्य रहाणे भी शामिल रहे। हालांकि टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन रहाणे ने साफ किया कि कठिन दौर के बावजूद उन्होंने कभी कप्तानी छोड़ने के बारे में नहीं सोचा।
केकेआर की शुरुआत इस सीजन में बेहद निराशाजनक रही थी। टीम अपने शुरुआती छह मुकाबलों में से पांच हार गई थी और जीत के लिए संघर्ष करती नजर आई। हालांकि बाद में टीम ने शानदार वापसी करते हुए अंतिम आठ मैचों में छह जीत दर्ज कीं, लेकिन इसके बावजूद वह प्लेऑफ में जगह बनाने में सफल नहीं हो सकी।
दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ आखिरी लीग मैच में 40 रन की हार के बाद रहाणे ने कहा कि उन्होंने हमेशा सकारात्मक सोच के साथ क्रिकेट खेला है। उनके अनुसार, मुश्किल परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और जज्बा बनाए रखना सबसे अहम होता है।
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रहाणे ने कहा कि वह जिम्मेदारियों से पीछे हटने वाले खिलाड़ी नहीं हैं। उनका मानना है कि जब टीम संघर्ष कर रही हो, तब कप्तान की भूमिका और भमहत्वपूर्णहो जाती है। उन्होंने स्वीकार किया कि दबाव हर कप्तान पर होता है, लेकिन मजबूत मानसिकता के साथ उस दबाव का सामना करना ही असली चुनौती है।
उन्होंने आगे कहा कि लगातार पांच-छह मैच हारने के बाद खिलाड़ी अक्सर अतीत और भविष्य को लेकर सोचने लगते हैं, लेकिन उस समय शांत रहना और टीम को संभालना जरूरी होता है।
इस सीजन में रहाणे का व्यक्तिगत प्रदर्शन भी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। अनुभवी बल्लेबाज ने 14 मैचों में 135 के स्ट्राइक रेट से 335 रन बनाए। हालांकि उन्होंने टीम के प्रदर्शन पर चोटिल खिलाड़ियों की अनुपस्थिति का असर भी माना।
रहाणे ने कहा कि कुछ प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने से टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने भारतीय गेंदबाजों पर भरोसा बनाए रखा। उनका कहना था कि युवा खिलाड़ियों को समय और समर्थन देने से वे दबाव की परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।आईपीएल 2026 में कई टीमों के कप्तानों की रणनीति और नेतृत्व पर सवाल उठे, जिनमें कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के कप्तान अजिंक्य रहाणे भी शामिल रहे। हालांकि टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन रहाणे ने साफ किया कि कठिन दौर के बावजूद उन्होंने कभी कप्तानी छोड़ने के बारे में नहीं सोचा।
केकेआर की शुरुआत इस सीजन में बेहद निराशाजनक रही थी। टीम अपने शुरुआती छह मुकाबलों में से पांच हार गई थी और जीत के लिए संघर्ष करती नजर आई। हालांकि बाद में टीम ने शानदार वापसी करते हुए अंतिम आठ मैचों में छह जीत दर्ज कीं, लेकिन इसके बावजूद वह प्लेऑफ में जगह बनाने में सफल नहीं हो सकी।
दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ आखिरी लीग मैच में 40 रन की हार के बाद रहाणे ने कहा कि उन्होंने हमेशा सकारात्मक सोच के साथ क्रिकेट खेला है। उनके अनुसार, मुश्किल परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और जज्बा बनाए रखना सबसे अहम होता है।
रहाणे ने कहा कि वह जिम्मेदारियों से पीछे हटने वाले खिलाड़ी नहीं हैं। उनका मानना है कि जब टीम संघर्ष कर रही हो, तब कप्तान की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने स्वीकार किया कि दबाव हर कप्तान पर होता है, लेकिन मजबूत मानसिकता के साथ उस दबाव का सामना करना ही असली चुनौती है।
उन्होंने आगे कहा कि लगातार पांच-छह मैच हारने के बाद खिलाड़ी अक्सर अतीत और भविष्य को लेकर सोचने लगते हैं, लेकिन उस समय शांत रहना और टीम को संभालना जरूरी होता है।
इस सीजन में रहाणे का व्यक्तिगत प्रदर्शन भी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। अनुभवी बल्लेबाज ने 14 मैचों में 135 के स्ट्राइक रेट से 335 रन बनाए। हालांकि उन्होंने टीम के प्रदर्शन पर चोटिल खिलाड़ियों की अनुपस्थिति का असर भी माना।
रहाणे ने कहा कि कुछ प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने से टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने भारतीय गेंदबाजों पर भरोसा बनाए रखा। उनका कहना था कि युवा खिलाड़ियों को समय और समर्थन देने से वे दबाव की परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।









