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महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामला: बृजभूषण शरण सिंह बरी, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनाया फैसला

महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामला: बृजभूषण शरण सिंह बरी, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनाया फैसला

नई दिल्ली: देशभर में चर्चा का विषय रहे महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार की अदालत ने पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और शिकायतकर्ता के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए।

करीब 1,133 दिनों तक चली कानूनी प्रक्रिया और 127 सुनवाई के बाद आए इस फैसले को देश के सबसे चर्चित खेल-संबंधी मामलों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस मामले में कई महिला पहलवानों ने वर्ष 2012 से 2022 के बीच विभिन्न अवसरों पर कथित यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी और बाद में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता के विभिन्न मंचों पर दिए गए बयानों में अंतर पाया गया, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हुआ। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर बृजभूषण शरण सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

जांच और सुनवाई रही चर्चा में

यह मामला वर्ष 2023 में देशभर में चर्चा का केंद्र बना था, जब कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की महिला पहलवानों ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन किया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जांच की और मामला अदालत पहुंचा। सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और अभियोजन व बचाव पक्ष ने विस्तृत दलीलें पेश कीं।

बचाव पक्ष ने रखा अपना पक्ष

बृजभूषण शरण सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान ने अदालत में पैरवी की। बचाव पक्ष का तर्क था कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपना फैसला सुनाया।

फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक और खेल जगत की चर्चा

अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर बचाव पक्ष ने फैसले का स्वागत किया है, वहीं मामले से जुड़े अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया पर भी सबकी नजर बनी हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर दिया गया है। यदि कोई पक्ष इस फैसले से असहमत है, तो उसे उच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

 

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