होटल-ढाबों में खाने की थाली के साथ जाम का दौर,शहर में बेखौफ चल रहा मयखाना!

महराजगंज।शहर के होटल और ढाबे इन दिनों भोजन कराने के साथ-साथ जाम छलकाने के कथित ठिकाने भी बनते जा रहे हैं। गोरखपुर रोड से लेकर फरेंदा रोड तक कई होटल और ढाबों पर खुलेआम शराब परोसे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग अब परिवार के साथ होटल में खाना खाने से पहले सौ बार सोचने को मजबूर हैं। जिस जगह पर कभी स्वादिष्ट भोजन और सुकून के कुछ पल बिताने की उम्मीद लेकर लोग पहुंचते थे, वहां अब शराब के दौर के बीच असहज माहौल मिलने की चर्चा है।होटल और ढाबों में भोजन करने पहुंचे कुछ ग्राहकों का आरोप है कि शराब का सेवन करने वाले लोग कई बार मर्यादा की सीमाएं लांघ जाते हैं। नशे में ऊंची आवाज में बातचीत, गाली-गलौज और दूसरे ग्राहकों से उलझना मानो कुछ लोगों की आदत बनती जा रही है। ऐसे में परिवार के साथ भोजन करने पहुंचे लोग चुपचाप खाना खत्म कर वहां से निकलना ही बेहतर समझते हैं। सवाल यह है कि आखिर भोजनालयों में खाने आए लोगों को शराबियों के बीच बैठकर भोजन करने की मजबूरी क्यों झेलनी पड़े?स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब के नशे में आए दिन विवाद और मारपीट की नौबत बनती रहती है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो कोई बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता। आबकारी विभाग और पुलिस की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर नियम-कानून केवल कागजों तक ही सीमित रहेंगे या धरातल पर भी दिखाई देंगे? शहरवासियों ने मांग की है कि होटल और ढाबों की नियमित जांच हो तथा बिना अनुमति शराब परोसने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वरना कहीं ऐसा न हो कि भोजन की तलाश में निकले परिवारों को जाम के नशे में डूबे विवादों का सामना करना पड़े।
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*धंधे की चिंता में मौन दुकानदार!*
शहर के पुराने सिनेमा हॉल के आसपास संचालित होटलों में इन दिनों खाने की थाली से ज्यादा शराबियों की महफिल चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार कई होटलों में शराब का सेवन करने वालों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। कुछ होटल संचालकों ने तो ऐसे ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बाकायदा केबिन तक बना रखे हैं, जहां कथित तौर पर जाम छलकाने की सुविधा मिलती है। दुकानदारों की चुप्पी भी कम दिलचस्प नहीं है। उन्हें शायद ग्राहकों की हरकतों से ज्यादा अपने कारोबार की चिंता सता रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि ये होटल भोजनालय हैं या पर्दे के पीछे चलने वाले मयखाने? जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेंगे?
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*बिरयानी खाने का है शौक तो जरा ठहरिए! कहीं जायका लेने के चक्कर में शराबियों के बीच न फंस जाए परिवार*
अगर आप बिरयानी के शौकीन हैं और किसी साफ-सुथरे माहौल में परिवार के साथ लजीज बिरयानी का स्वाद लेने की सोच रहे हैं, तो जरा ठहर जाइए! वरना जायके का यह शौक आपको पछताने पर मजबूर कर सकता है। शहर में खुले दर्जनों बिरयानी सेंटरों पर बिरयानी की खुशबू के बीच कथित तौर पर जाम के दौर भी चल रहे हैं। नतीजा यह कि परिवार के साथ भोजन करने पहुंचे लोगों को असहज माहौल का सामना करना पड़ सकता है। सवाल यह है कि आखिर भोजनालयों में जायके के साथ शराबखोरी का यह सिलसिला कब थमेगा? जिम्मेदार विभागों की नजर आखिर कब पड़ेगी?



