1725 नई ई-बसों को मंजूरी, शासकीय अधिवक्ताओं का मानदेय बढ़ा

आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी

कैबिनेट फैसले

लखनऊ। कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए धनराशि स्वीकृत करने और व्यय संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से प्रदेश में आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नगरीय विकास को नई गति मिलेगी। प्रदेश सरकार द्वारा तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहरों के नियोजित विस्तार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। योजना के संचालन के लिए 6 अप्रैल 2023 को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर नगरीय अवसंरचना विकसित करने में सुविधा मिलेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसी के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास के लिए संबंधित अभिकरणों को कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है। इसके सापेक्ष प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त करने का निर्णय लिया गया है।

नगरीय परिवहन को मिलेगा आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल स्वरूप

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार शाम आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1725 वातानुकूलित इले्ट्रिरक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य नगरीय परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और यात्री सुविधाओं के अनुरूप बनाना है।
योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी तथा नोएडा (जेवर सहित) में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 एसी ई-बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों द्वारा जीसीसी मॉडल पर किया जाएगा और अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन तिथि से 12 वर्ष होगी। जीसीसी मॉडल के अंतर्गत बसों की खरीद, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, चालक एवं तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता, बसों का संचालन और अनुरक्षण की पूरी जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी। निर्धारित मानकों के आधार पर उन्हें संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क का भुगतान किया जाएगा। योजना के तहत 12 मीटर ई-बस पर 40 लाख रुपये तथा 9 मीटर ई-बस पर 35 लाख रुपये प्रति बस की दर से अनुदान भी दिया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक डिपो निर्माण के लिए भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। किराया एवं उपयोगकर्ता शुल्क का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इस योजना से सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित एवं समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही निजी निवेश के माध्यम से सरकारी वित्तीय भार कम होगा तथा प्रदेश के शहरों में आधुनिक शहरी परिवहन तंत्र को नई मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि अभी 15 नगर निगमों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा 743 इले्ट्रिरक बसों का संचालन किया जा रहा है।

यूपी सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन को मंजूरी
लखनऊ। योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। राज्य सरकार का मानना है कि बदलते औद्योगिक परिदृश्य, निवेशकों की आवश्यकताओं, अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा तथा भारत सरकार के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के साथ बेहतर सामंजस्य स्थापित करने के लिए नीति में संशोधन आवश्यक था। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 को 19 जनवरी 2024 को अधिसूचित किया गया था। यह नीति अधिसूचना की तिथि से 5 वर्षों तक प्रभावी रहेगी। संशोधन के माध्यम से नीति को और अधिक निवेशक अनुकूल बनाया गया है, जिससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश आकर्षित किए जा सकेंगे। इन संशोधनों से राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। नीति के तहत निवेशकों को परियोजना के वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तिथि से कम से कम 3 वर्षों तक उत्पादन संचालन बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी देनी होगी।

जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्रों के विनियमतीकरण को मंजूरी

लखनऊ। योगी कैबिनेट ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत किए गए मानचित्रों के विनियमतीकरण तथा विकास क्षेत्र, विस्तारित विकास क्षेत्र एवं विनियमित क्षेत्रों में, जहां अभी महायोजना तैयार नहीं है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय से लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकासात्मक समस्या का समाधान होगा। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा पूर्व में स्वीकृत किए गए मानचित्रों की वैधता को लेकर जो प्रश्न उठ रहे थे, उन्हें विनियमतीकरण के माध्यम से दूर किया जा सकेगा। इससे आम नागरिकों, भू-स्वामियों और निर्माणकर्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार जिन विकास क्षेत्रों, विस्तारित विकास क्षेत्रों अथवा विनियमित क्षेत्रों की महायोजना अभी तैयार नहीं हुई है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए एक स्पष्ट और मानकीकृत प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। इससे ऐसे क्षेत्रों में भी निर्माण कार्यों को नियमानुसार स्वीकृति मिल सकेगी और अनिश्चितता की स्थिति समाप्त होगी। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मानक संचालन प्रक्रिया को लागू करने से राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। वहीं इसके माध्यम से शहरी क्षेत्रों में सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा निर्माण गतिविधियों में पारदर्शिता और सुगमता आएगी।

बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु पर मुआवजा नीति को मंजूरी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में मृतक बंदियों के आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को मुआवजा भुगतान के लिए ‘उत्तर प्रदेश बंदी मृत्यु एवं मुआवजा भुगतान नीति’ बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। नई नीति का उद्देश्य बंदियों के मानवाधिकारों की रक्षा, कारागार प्रशासन में पारदर्शिता तथा पीड़ित परिवारों को समयबद्ध राहत सुनिश्चित करना है। वर्तमान में बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली की संस्तुतियों के आधार पर मुआवजा भुगतान की व्यवस्था प्रचलित है। हालांकि इस प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर अनुमोदन और औपचारिकताओं के कारण मृतक बंदियों के आश्रितों को मुआवजा मिलने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग जाता था। इसी समस्या के समाधान के लिए योगी सरकार ने एक स्पष्ट और संस्थागत नीति बनाने का निर्णय लिया है। नई नीति के तहत कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु होने पर उनके आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान अधिक त्वरित और सुव्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे, जिससे सभी मामलों में एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित हो सके।

मोहनलालगंज में बनेगा नया उप निबंधक कार्यालय

लखनऊ। योगी कैबिनेट ने जनपद लखनऊ के मोहनलालगंज में नए उप निबंधक कार्यालय के निर्माण हेतु भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से क्षेत्रीय नागरिकों को भूमि, भवन, विवाह, किरायानामा, गिफ्ट डीड तथा अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण संबंधी सेवाएं अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित ढंग से उपलब्ध हो सकेंगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार ग्राम मऊ, परगना एवं तहसील मोहनलालगंज स्थित कुल 953 वर्गमीटर भूमि राजस्व विभाग से स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। इस भूमि पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त उप निबंधक कार्यालय भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें सब-रजिस्ट्रार कक्ष, रजिस्ट्रेशन कक्ष, अभिलेखागार, प्रतीक्षालय, पेयजल एवं महिला-पुरुष शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश सरकार के अनुसार स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग राज्य का प्रमुख राजस्व अर्जित करने वाला विभाग है और प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख विलेखों का पंजीकरण करता है।
बढ़ती जनसंख्या और पंजीकरण कार्यों की संख्या को देखते हुए नए कार्यालय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि राजस्व विभाग द्वारा स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग को उक्त भूमि हस्तांतरण से संबंधित पट्टा विलेख पर स्टाम्प शुल्क तथा पंजीकरण शुल्क से पूर्ण छूट प्रदान की जाएगी। इससे विभागीय प्रक्रिया सरल होगी और भवन निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

15 जून से 31 जुलाई तक 25 जिलों में होगी एमएसपी पर मक्का खरीद

लखनऊ। कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 (रबी फसल) के लिए मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत मक्का खरीद नीति को मंजूरी प्रदान की गई। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार प्रदेश में मक्का खरीद 15 जून 2026 से 31 जुलाई 2026 तक की जाएगी। इसके लिए फिरोजाबाद, आगरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बदायूं, शाहजहांपुर, रामपुर, संभल, बुलंदशहर, हापुड़, कानपुर नगर, औरैया, इटावा, कन्नौज, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, बहराइच, बलिया, गोंडा, फतेहपुर और मिर्जापुर कुल 25 जनपदों में 150 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश में 25 हजार मीट्रिक टन मक्का खरीद का कार्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों से खरीद कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, आधार कार्ड एवं फोटोयुक्त पहचान पत्र के आधार पर की जाएगी। इसके साथ ही भूमि और बोए गए रकबे का सत्यापन भूलेख पोर्टल से ऑनलाइन कराया जाएगा। योगी सरकार ने किसानों को त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की है कि क्रय एजेंसियों द्वारा खरीदे गए मक्का का मूल्य पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से किसानों के आधार लिंक एवं एनपीसीआई मैप्ड बैंक खातों में यथासंभव 48 घंटे के भीतर हस्तांतरित किया जाएगा।

राज्य विधि अधिकारियों की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति

लखनऊ। कैबिनेट बैठक में राज्य विधि अधिकारियों को दी जाने वाली रिटेनरशिप एवं प्रति सुनवाई फीस में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार से संबंधित मुकदमों और वादों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न जिला न्यायालयों, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ तथा उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में आबद्ध राज्य विधि अधिकारी राज्य के हितों की रक्षा और प्रभावी विधिक प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। वर्तमान में उन्हें देय रिटेनरशिप एवं बहस शुल्क का निर्धारण 10 से 15 वर्ष पूर्व जारी शासनादेशों के आधार पर किया जा रहा था। बदलते समय, बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों और न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने इन शुल्कों में वृद्धि का निर्णय लिया है। योगी सरकार के इस फैसले से अनुभवी एवं दक्ष अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा तथा विभिन्न न्यायालयों में राज्य सरकार के पक्ष की और अधिक प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सकेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही न्याय विभाग द्वारा की जाएगी। जिला शासकीय अधिवक्ताओं का मासिक मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 14 हजार रुपये कर दिया गया है, जबकि प्रति सुनवाई फीस 1650 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी गई है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं का मानदेय भी 7900 रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के विधि अधिकारियों को सीधा लाभ मिलेगा।

1460 करोड़ रुपये से पांच नए जिला कारागारों का होगा निर्माण

लखनऊ। योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में प्रदेश के पांच जनपदों- मुरादाबाद, कानपुर नगर, औरैया, ललितपुर और भदोही में नवीन जिला कारागारों के निर्माण की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई। इन परियोजनाओं पर 1460 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। सरकार का उद्देश्य कारागारों में भीड़भाड़ कम करना, बंदियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा कारागार प्रशासन को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है। निर्णय के अनुसार मुरादाबाद में 2000 बंदी क्षमता का नया जिला कारागार 386.91 करोड़ रुपये की लागत से, कानपुर नगर में 2030 बंदी क्षमता का कारागार 384.05 करोड़ रुपये की लागत से तथा औरैया में 1056 बंदी क्षमता का कारागार 264.96 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया जाएगा। इसी प्रकार ललितपुर में 552 बंदी क्षमता की नई जेल 225.06 करोड़ रुपये तथा भदोही में 574 बंदी क्षमता की नई जेल 209.18 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी। नए कारागारों के निर्माण से बंदियों के आवास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुधारात्मक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा।

इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी

-झांसी में गोआश्रय और पशु सेवा केंद्र के लिए एमओयू को मंजूरी, पशुपालन विभाग की 5 एकड़ भूमि पर निजी संस्था के सहयोग से संचालित होंगी पशु कल्याण गतिविधियां

-कानपुर में ईएसआई अस्पतालों के हस्तांतरण को मंजूरी, राज्य सरकार द्वारा संचालित पांडुनगर अस्पताल भारत सरकार को और भारत सरकार द्वारा संचालित जाजमऊ अस्पताल राज्य सरकार को सौंपा जाएगा

Chief Reporter Pioneer Hindi

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