वृंदावन लीची बाग: डॉक्टर की मेहनत से खिला पिता के सपने का फल

पिता का अधूरा सपना, बेटे ने जैविक खेती से किया पूरा

पायनियर संवाददाता (अदनान खान )। पीलीभीत

यह कहानी पीलीभीत के डॉ शैलेंद्र नाथ मिश्रा की है, जिन्होंने न केवल एक डॉक्टर के रूप में मरीजों की नब्ज टटोली, बल्कि अपने दिवंगत पिता के सपने को सींचकर,वृन्दावन लीची बाग, के रूप में एक मीठी इबारत लिख दी है। आमतौर पर एक डॉक्टर का जीवन क्लीनिक के मरीजों और दवाओं के इर्द-गिर्द ही सिमटा रहता है। शहर के मोहल्ला तखान निवासी और चरक क्लीनिक के संचालक डॉ शैलेंद्र नाथ मिश्रा ने चिकित्सा के साथ-साथ प्रकृति के प्रति अपने प्रेम की एक अनूठी मिसाल पेश की है। आज उनका वृन्दावन लीची बाग अपनी जैविक लीची के लिए पूरे जिले में आकर्षण का केंद्र बन चुका है। यह कहानी सिर्फ बागवानी की नहीं, बल्कि एक बेटे द्वारा अपने पिता के अधूरे सपने को हकीकत में बदलने के संकल्प की है।

पिता का अधूरा सपना और पुत्र का संकल्प

इस बाग की नींव डॉ शैलेंद्र के पिता स्वर्गीय नरेंद्र नाथ मिश्रा ने वर्ष 1994 के आसपास रखी थी। उन्हें लीची का बाग लगाने का गहरा शौक था,लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सालों तक पौधों से मनमाफिक फल नहीं मिल पाए। पिता के गुजरने के बाद यह बाग एक अधूरी हसरत बनकर रह गया था।डॉ शैलेंद्र ने अपने पिता के इस सपने को मरने नहीं दिया। उन्होंने जनवरी 2025 में राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र से तकनीकी मार्गदर्शन लिया और बाग को वैज्ञानिक व आधुनिक तरीके से पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। उनका कहना है उन्होंने पौधों की देखभाल ठीक वैसे ही की जैसे एक डॉक्टर अपने गंभीर मरीज का इलाज करता है। शुरुआत में कुछ रासायनिक खादों के इस्तेमाल के बाद डॉ शैलेंद्र का मन नहीं माना। उन्होंने पूरी तरह से जैविक और कार्बनिक पद्धति को अपनाया। उनकी यह निष्ठा रंग लाई और मई-जून 2026 के इस सीजन में बाग पेड़ों पर लदी रसीली लीचियों से मुस्कुरा उठा।

सोशल मीडिया पर लोकप्रियता, खुद बने माली

शैलेंद्र ने जब सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी इस बिना केमिकल वाली ऑर्गेनिक लीची की जानकारी लोगों से साझा की, तो बाग में लोगों का तांता लग गया। इस पूरी कहानी का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि एक प्रतिष्ठित डॉक्टर होने के बावजूद, डॉ शैलेंद्र खुद जमीन पर बैठकर एक आम माली की तरह ग्राहकों को लीची तौलकर और परोसते नजर आए। बाजार से कम दाम पर शुद्व और सेहतमंद लीची उपलब्ध कराने के उनके इस सादगी भरे अंदाज ने शहरवासियों का दिल जीत लिया है।

शैलेंन्द्र ने बताया कि वे, पिता की विरासत को प्रदेश स्तर पर चमकाना चाहते है

इस पहली और शानदार सफलता ने डॉ शैलेंद्र के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। भावुक होते हुए वे कहते हैं,यह केवल एक फसल नहीं है, बल्कि मेरे पिता के हाथों से लगाई गई पौध का आशीर्वाद है।अब उनका लक्ष्य आने वाले सालों में पैदावार को और बेहतर बनाना है, ताकि वे अपने पिता के इस वृन्दावन लीची बाग को उत्तर प्रदेश में एक अलग पहचान दिला सकें।

डॉ शैलेंद्र नाथ मिश्रा का यह अनूठा प्रयास समाज को न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहा है, बल्कि यह संदेश भी दे रहा है कि अगर किसी काम में सच्ची लगन और अपनों का आशीर्वाद शामिल हो तो उसकी मिठास दूर-दूर तक फैलती है।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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