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केदार ताल में शुरू होगा सप्ताहभर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण

केदार ताल में शुरू होगा सप्ताहभर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण
  • जिलाधिकारी ने 20 सदस्यीय विशेषज्ञ दल को दिखाई हरी झंडी

  • ग्लेशियल झील के जोखिम और भौगोलिक स्थिति का होगा अध्ययन

पायनियर समाचार सेवा। उत्तरकाशी। राष्ट्रीय हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (जीएलओएफ) जोखिम शमन कार्यक्रम के तहत उत्तरकाशी जनपद स्थित केदार ताल का व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं संयुक्त स्थलीय निरीक्षण 15 से 21 सितंबर तक किया जाएगा। इस अभियान के लिए विभिन्न संस्थानों के 20 सदस्यीय विशेषज्ञ दल को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मंगलवार को गढ़वाल मंडल विकास निगम परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सर्वेक्षण के दौरान केदार ताल में बैथमेट्री सर्वेक्षण, स्थलीय निरीक्षण और संयुक्त वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। विशेषज्ञ दल झील की गहराई, जल की मात्रा, आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों तथा क्षेत्र में संभावित आपदा जोखिमों का विस्तृत आकलन करेगा। अभियान में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान लखनऊ, आईटीबीपी तथा जिला प्रशासन के विशेषज्ञ संयुक्त रूप से भाग ले रहे हैं। दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदार ताल तक आवश्यक उपकरण और सामग्री पहुंचाने के लिए लगभग 20 सदस्यीय पर्वतीय पोर्टर दल भी विशेषज्ञों के साथ रवाना हुआ है। यह दल सर्वेक्षण कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने में सहयोग करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में स्थित ग्लेशियल झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। झीलों की गहराई, जल भंडारण क्षमता और समय के साथ होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन संभावित हिमनद झील विस्फोट बाढ़ के जोखिम का आकलन करने में सहायक होता है। सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भविष्य में जोखिमों की पहचान, निगरानी तंत्र को मजबूत करने और आपदा की स्थिति में प्रभावी तैयारी एवं प्रतिक्रिया योजना तैयार करने में किया जाएगा। दल को रवाना करते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने अभियान में शामिल विशेषज्ञों, अधिकारियों और पर्वतीय पोर्टर दल को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में इस प्रकार के अभियान चुनौतीपूर्ण होते हैं, लेकिन विभिन्न विभागों और संस्थानों के समन्वय से इसे सफलतापूर्वक पूरा किया जाएगा। इस अवसर पर अपर सचिव आपदा प्रबंधन प्रकाश चंद, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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