उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना की लॉन्चिंग और वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के लोगो अनावरण कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नदियों के कैचमेंट एरिया, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों पर अवैध कब्जा रोकना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों की सुरक्षा के लिए जनभागीदारी बेहद आवश्यक है। यदि प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा भी समाज की जिम्मेदारी
सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने हर घर नल योजना जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्व सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि कहीं नलों की टोंटियां चोरी कर ली जाती हैं तो कहीं सरकारी संसाधनों को क्षति पहुंचाई जाती है।मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि समाज को ऐसे तत्वों के खिलाफ जागरूक रहना चाहिए और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझना चाहिए।
कुकरैल में विकसित हुआ ‘सौमित्र वन’
मुख्यमंत्री ने लखनऊ के कुकरैल क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां अवैध कब्जों को हटाकर ‘सौमित्र वन’ विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी अतिक्रमण की चपेट में था, आज वह राजधानी के सबसे सुंदर और आकर्षक प्राकृतिक स्थलों में शामिल हो चुका है।उन्होंने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि यदि इच्छाशक्ति और जनसहयोग हो तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव संभव हैं।
भू-माफिया और वन्यजीव तस्करों से सावधान रहने की अपील
योगी आदित्यनाथ ने भू-माफिया, वन-माफिया, अवैध कटान करने वालों, वन्यजीव तस्करों और अवैध खनन में शामिल लोगों को पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ने का काम करते हैं, इसलिए इनके खिलाफ समाज और प्रशासन दोनों को सतर्क रहना होगा।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को बताया जनआंदोलन
मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी स्वयं उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल पौधारोपण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों को सुरक्षित रखना, जल संरक्षण करना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना भी उतना ही आवश्यक है।
बदलता मौसम बना चिंता का विषय
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम चक्र पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 40 से 50 वर्ष की आयु का लगभग हर व्यक्ति महसूस कर सकता है कि पिछले कुछ दशकों में पर्यावरण के साथ हुए अत्यधिक हस्तक्षेप का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि आज मौसम का चक्र पहले की तुलना में लगभग एक से डेढ़ महीने तक प्रभावित हो चुका है। मौसम में हो रहे इस बदलाव का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है।
किसानों और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है असर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम चक्र में लगातार बदलाव के कारण अतिवृष्टि और अनावृष्टि जैसी स्थितियां बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पर्यावरण संरक्षण पर गंभीरता से काम नहीं किया गया तो भविष्य में खाद्यान्न संकट जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ती चिंता इसी खतरे का संकेत है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि असमय आने वाली प्राकृतिक आपदाएं प्रकृति की चेतावनी हैं। इन संकेतों को समझते हुए पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।










