उत्तर प्रदेश के गोंडा दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कानून-व्यवस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और विकास के मुद्दों को उठाते हुए 2017 से पहले की स्थिति और वर्तमान सरकार के कामकाज की तुलना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2015 में गोंडा में दुर्गा पूजा के दौरान दंगा हुआ था और उस समय त्योहारों को स्वतंत्र रूप से मनाने की अनुमति नहीं मिलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में सत्ता में बैठे लोग “पेशेवर गुंडों के सामने नतमस्तक” रहते थे और कई-कई महीनों तक कर्फ्यू की स्थिति बनी रहती थी। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में प्रदेश में किसी भी त्योहार में व्यवधान डालने की अनुमति नहीं है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जो भी शांति भंग करने की कोशिश करेगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
सीएम योगी ने अयोध्या का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भगवान राम का नाम लेने तक पर प्रतिबंध जैसा माहौल था और वहां जाने वाले रामभक्तों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने बिना नाम लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि आज अयोध्या में भव्य विकास हुआ है और यह एक नए मॉडल के रूप में सामने आई है, जहां लोग गर्व की अनुभूति करते हैं।
विकास कार्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले विकास एक विशेष क्षेत्र तक सीमित था, लेकिन अब राज्य के हर जिले में समान रूप से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों का निर्माण केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि गोंडा, बहराइच, अयोध्या, बस्ती और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों में भी तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने महाराजा सुहेलदेव का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोंडा का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व रहा है, लेकिन आजादी के बाद यह क्षेत्र विकास के बजाय तुष्टिकरण और भाई-भतीजावाद का शिकार हो गया था।
उन्होंने आगे कहा कि पहले गोंडा के युवाओं के सामने पहचान और रोजगार का संकट था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में निवेश बढ़ा है और रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि अब योजनाओं का लाभ जाति के आधार पर नहीं बल्कि पात्रता के आधार पर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में सियासी हलचल तेज होने की संभावना है, जहां कानून-व्यवस्था, विकास और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दे केंद्र में बने हुए हैं।










