सहारनपुर। राज्य कर विभाग की ओर से 1 से 10 जून तक जिले के विभिन्न खंडों में “व्यापारी संवाद कार्यक्रम” आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप हर खंड स्तर पर होने वाले इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर जीएसटी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाना है।
शासन के निर्देश पर कर विभाग की ओर से चलाये जा एक मुहिम के तहत व्यापारियों को नियमित अनुपालन के लिए 1 से 10 जून तक जिले के विभिन्न खंडों में “व्यापारी संवाद कार्यक्रम” आयोजित किए जा रहे हैं।
संयुक्त आयुक्त अमित कुमार पाठक राज्य कर ने बताया कि इन संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापारियों की कर संबंधी समस्याओं का समयबद्ध निराकरण किया जाएगा। इसके साथ ही विभाग और व्यापारियों के बीच विश्वास एवं समन्वय को सुदृढ़ करना भी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से जमीनी स्तर पर आ रही दिक्कतों को समझकर उनका त्वरित समाधान संभव होगा। पाठक ने कहा कि कई व्यापारी नए नियमों से अनजान रहते हैं, जिससे उन्हें परेशानी होती है। संवाद कार्यक्रम इस अंतर को पाटने का काम करेंगे।
विभागीय जानकारी के मुताबिक आयोजन के दौरान और बाद में रिटर्न दाखिल न करने वाले व्यापारियों को नियमित अनुपालन के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही जीएसटी पोर्टल पर मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी पंजीकृत कराने पर भी जोर रहेगा। विभाग का लक्ष्य अपंजीकृत व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे मुख्यधारा से जुड़ सकें। “व्यापारी संवाद कार्यक्रम” जीएसटी 2.0 के अंतर्गत लागू नए प्रावधानों, व्यापारी हितैषी सुधारों और ई-इन्वॉइसिंग जैसी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी भी व्यापारियों को दी जाएगी।विभाग का मानना है कि व्यापारियों की भागीदारी से ही कार्यक्रम सफल होंगे और जीएसटी व्यवस्था और सरल बन सकेगी। राज्य कर विभाग ने सभी व्यापारी बंधुओं, उद्योग एवं व्यापार संगठनों, अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों और व्यापार मंडल प्रतिनिधियों से इन कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता की अपील की है।सरकार का लक्ष्य ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है। व्यापारी संवाद कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे कर प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और राजस्व संग्रह भी बढ़ेगा।
वेद प्रकाश पाण्डेय










