सर्वे के नाम पर खानापूर्ति, किसानों का हंगामा, दोबारा सर्वे की मांग तेज
लेखपाल पर सर्वे में गड़बड़ी का आरोप, ऊंच गांव के किसान ने दोबारा जांच की उठाई मांग

लखीमपुर-खीरी। बीसी के बाद अब लेखपाल पर फसल मुआवजा सर्वे में गड़बड़ी का गंभीर आरोप लगा है। तूफान से तबाह हुई फसलों का उचित मुआवजा देने के सरकारी दावों की पोल निघासन-धौरहरा तहसील के ऊंच गांव में खुल गई है, जहां एक किसान को 7 बीघा फसल के नुकसान पर महज 4200 रुपये देकर टरका दिया गया। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों आए तेज तूफान और बारिश से जिले में धान, गन्ना और केले की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था।
शासन ने लेखपालों को गांव-गांव जाकर नुकसान का सर्वे कर मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए थे। किसानों को उम्मीद थी कि नुकसान की भरपाई हो जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली।
ऊंच गांव के पीड़ित किसान का आरोप है कि लेखपाल ने उसके खेत का सही से सर्वे ही नहीं किया। किसान का कहना है कि तूफान में उसकी करीब सात बीघा फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, लेकिन जांच रिपोर्ट में लेखपाल ने नुकसान को घटाकर मात्र एक से डेढ़ बीघा दिखा दिया।
इसी गलत रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने उसे 4200 रुपये का मुआवजा जारी कर दिया, जबकि नियमानुसार उसे करीब 12 हजार रुपये मिलना चाहिए था।
किसान ने बताया कि सर्वे के दौरान उसकी एक नहीं सुनी गई और खेत में जाकर वास्तविक नुकसान का आकलन करने के बजाय खानापूर्ति कर दी गई। इससे वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। अब पीड़ित किसान ने जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच और खेत का दोबारा सर्वे कराकर पूरा मुआवजा दिलाने की मांग की है।



