अल्मोड़ा का ऐतिहासिक नंदा देवी का मेला देवभूमि की संस्कृति का ध्वजवाहक

| पायनियर समाचार सेवा। अल्मोड़ा। उत्तराखंड के कण -कण देवी -देवताओ का निवास है अल्मोड़ा का नंदा देवी का मेला देवभूमि की संस्कृति का ध्वजवाहक है 400 साल से चले आ रहे ऐतिहासिक नंदा देवी के मेले में जागर गायन की परंपरा भी उतनी ही पुरानी है अल्मोड़ा में चंद्रवंशियों के शासनकाल में मल्ला महल से 17वीं शताब्दी में नंदा देवी मेले की शुरूआत हुई मेले के साथ ही यहां नंदा जागर गायन की परंपरा चली आ रही है नंदा देवी मेले में 400 साल से छानी -लवेशाल गांव के नंदा जागर गाने वाले लगातार मेले में प्रतिभाग करते हैं इस गांव में पीढ़ी दर पीढ़ी जागरण की परंपरा चली आ रही है यहां के लोग लगातार पिछले 400 सालों से हर वर्ष नंदा देवी मेले की शुरूआत के साथ ही यहां जागर गाने पहुंच जाते हैं मा नंदा की जागर तीन पहर गई जाती है नंदा देवी से जुड़े तमाम किस्से कहानी है उनमें जाकर भी प्रमुख है अल्मोड़ा के प्रखर साहित्यकार प्रोफेसर देव सिंह पोखरिया बताते हैं नंदा के जागर में सृष्टि के शुरूआत का भी जिक्र होता है शाम को लगने वाली है जागर में आदिदेवी नंदा के साथ सभी देवी देवताओं को निमंत्रित किया जाता है और ऐतिहासिक व पौराणिक गाथाओ को यह जगरिए वंदन करते है। |



