डाककर्मियों की मनमानी से त्रस्त उपभोक्ता, बिना डिलीवरी किए ही एटीएम कार्ड-चेकबुक लौटाने का खेल!

‘प्राप्तकर्ता का पता नहीं मिला’ लिखकर बैंकों को वापस भेजे जा रहे महत्वपूर्ण दस्तावेज

बैंक और डाकघर के चक्कर काट रही जनता, आर्थिक नुकसान के साथ बढ़ रही परेशानी

ब्यूरो सन्नी गर्ग। शामली/कैराना

डाक विभाग के कुछ कर्मचारियों की कथित लापरवाही और मनमानी के चलते बैंक उपभोक्ताओं की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। आरोप है कि बैंकों द्वारा भेजे गए एटीएम कार्ड, चेकबुक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को संबंधित पते पर पहुंचाने के बजाय “प्राप्तकर्ता का पता नहीं मिला” की टिप्पणी दर्ज कर वापस बैंकों को भेजा जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं को बैंक और डाकघर के बीच चक्कर काटने पड़ रहे हैं तथा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

कस्बे के मोहल्ला गुलशन नगर दरबार खुर्द निवासी सुहैब व खेलकला ईदगाह रोड निवासी खाताधारकों का कहना है कि उनके पते पर वर्षों से सरकारी पत्र, आधार कार्ड, बिजली बिल और अन्य डाक सामग्री नियमित रूप से पहुंचती रही है, लेकिन बैंकिंग दस्तावेजों के मामले में अचानक वही पते “नहीं मिले” घोषित कर दिए जाते हैं। आरोप है कि यहां तैनात चर्चित डाककर्मी नावेद घर पर ही बैठकर “पता नहीं मिला” लिखकर डाक वापस भेज रहा है। संपर्क करने पर एक ही जवाब मिलता है कि बैंक से संपर्क करें। इससे डाक वितरण प्रणाली की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में डाककर्मी संबंधित पते पर पहुंचने या प्राप्तकर्ता से संपर्क करने का प्रयास तक नहीं करते।

इसके बजाय दस्तावेजों पर ‘पता नहीं मिला’ की रिपोर्ट लगाकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। नतीजतन उपभोक्ताओं को पहले बैंक में जानकारी लेनी पड़ती है, फिर डाकघर के चक्कर लगाने पड़ते हैं और अंततः दोबारा एटीएम कार्ड अथवा चेकबुक जारी कराने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस लापरवाही का सबसे अधिक असर बुजुर्गों, ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। एटीएम कार्ड न मिलने से लोग बैंकिंग सेवाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, जबकि चेकबुक वापस लौट जाने से कई जरूरी भुगतान और वित्तीय लेन-देन प्रभावित हो रहे हैं। कई उपभोक्ताओं को दोबारा आवेदन करने में अतिरिक्त समय और धन भी खर्च करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि डाक विभाग की यह कार्यशैली आम जनता को अनावश्यक रूप से परेशान कर रही है।

यदि दस्तावेजों की वास्तविक रूप से डिलीवरी का प्रयास किया जाए तो अधिकांश मामलों में यह समस्या उत्पन्न ही न हो। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और बिना उचित कारण दस्तावेज वापस भेजने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।क्षेत्रवासियों का कहना है कि बैंकिंग दस्तावेज कोई सामान्य डाक नहीं बल्कि लोगों की आर्थिक गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात होते हैं। इनके वितरण में बरती जा रही लापरवाही सीधे तौर पर जनता के हितों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर व्यवस्था में सुधार लाने की मांग की है।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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