अंद्रीवा और च्वालिंस्का के बीच होगी खिताबी ​भिड़ंत, फ्रेंच ओपन को मिलेगा नया चैंपियन

पेरिस। फ्रेंच ओपन महिला एकल फाइनल में शनिवार को दो उभरती हुई खिलाड़ियों के बीच मुकाबला होगा, जब रूस की 19 वर्षीय मीरा अंद्रीवा का सामना पोलैंड की माया च्वालिंस्का से होगा। दोनों खिलाड़ी पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंची हैं, इसलिए रोलां गैरो को इस बार नया चैंपियन मिलने जा रहा है। पिछले वर्ष अंद्रीवा इस टूर्नामेंट में दबाव नहीं संभाल सकी थीं। फ्रेंच ओपन के सेमीफाइनल में जगह बनाने की दौड़ में वह अपेक्षाकृत कम चर्चित खिलाड़ी लोइस बोइसन के खिलाफ अपना आपा खो बैठी थीं और सीधे सेटों में हार गई थीं। मैच के दौरान गुस्से में गेंद दर्शक दीर्घा की ओर मारने पर उन्हें चेतावनी भी मिली थी।

लेकिन बीते दो सप्ताह में ऐसी कोई स्थिति देखने को नहीं मिली। अभी केवल 19 वर्ष की अंद्रीवा पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंची हैं। दबाव अब भी है, लेकिन उसे संभालना उन्होंने सीख लिया है।सेमीफाइनल में इस सत्र की सर्वश्रेष्ठ क्ले-कोर्ट खिलाड़ियों में से एक मार्ता कोस्त्युक को हराने के बाद अंद्रीवा ने कहा, “अब भी ऐसे मैचों में मुझे घबराहट होती है। पहले अगर मेरी सर्विस टूट जाती थी तो लगता था जैसे सब खत्म हो गया हो। लेकिन अब मैं सोचती हूं कि अगर प्रतिद्वंद्वी ने मेरी सर्विस तोड़ दी है तो कोई बात नहीं, मैं भी उसकी सर्विस तोड़ने की कोशिश करूंगीउनका यह बदला हुआ नजरिया कारगर साबित हुआ है। आठवीं वरीयता प्राप्त अंद्रीवा ने फाइनल तक के सफर में केवल एक सेट गंवाया है। खिताबी मुकाबले में उनका सामना क्वालीफायर और विश्व रैंकिंग में 114वें स्थान पर काबिज माया च्वालिंस्का से होगा।

फ्रेंच ओपन से पहले किसी ग्रैंड स्लैम में च्वालिंस्का का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2022 के विंबलडन में दूसरे दौर तक पहुंचना था। वह पेशेवर युग (1968) में ग्रैंड स्लैम एकल फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी क्वालीफायर खिलाड़ी हैं। उनसे पहले एमा रादुकानू ने 2021 यूएस ओपन का खिताब जीता था।पेरिस में च्वालिंस्का ने अपने अप्रत्याशित प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। उन्होंने नौ में से आठ मुकाबले सीधे सेटों में जीते हैं। उनकी पहचान विविध शॉट्स, शानदार लॉब और ड्रॉप शॉट्स से है। उनकी शैली अंद्रीवा के ताकतवर खेल से बिल्कुल अलग है।च्वालिंस्का ने कहा, “मुझे पता है कि मेरा खेल टूर की अधिकांश खिलाड़ियों से अलग है। मेरे पास बहुत ताकतवर खेल दिखाने के लिए जरूरी शारीरिक क्षमता नहीं है, इसलिए मुझे अपने लिए अलग तरह के शॉट विकसित करने पड़े। यही मेरे लिए फायदेमंद साबित हुआ है।

अंद्रीवा अगर खिताब जीतती हैं तो वह 1992 में 18 वर्षीय मोनिका सेलेस के बाद फ्रेंच ओपन महिला एकल का खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन जाएंगी। वहीं, च्वालिंस्का जीत दर्ज कर पेशेवर युग में क्वालीफायर के रूप में ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीतने वाली चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो जाएंगी।

Senior Sports Reporter Pioneer Hindi

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