नैमिषारण्य को विश्वस्तरीय तीर्थ बनाने की कवायद तेज

डीएम ने की विकास कार्यों की समीक्षा 

वैभव दीक्षित। सीतापुर

विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थस्थल नैमिषारण्य धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं। जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद की बैठक में विभिन्न विकास परियोजनाओं, आधारभूत सुविधाओं और तीर्थयात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि नैमिषारण्य देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में तीर्थयात्रियों को उच्चस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण एवं विकास कार्य निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। बैठक में चक्रतीर्थ, ललिता देवी मंदिर, हनुमानगढ़ी, व्यास गद्दी और मनु-सतरूपा तपस्थली सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुविधाओं की समीक्षा की गई।

श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, यात्री सहायता केंद्र, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा प्रबंधों को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, यातायात प्रबंधन, सीसीटीवी निगरानी और पर्यावरण संरक्षण संबंधी योजनाओं पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि विकास कार्यों के साथ नैमिषारण्य की धार्मिक एवं प्राकृतिक विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए।

श्रद्धालुओं की सुविधा होगी प्राथमिकता

नैमिषारण्य धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने के लिए प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। परिषद की बैठक में पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थल, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था और यात्री सहायता केंद्रों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास स्वच्छता और सौंदर्यीकरण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और उन्हें सुरक्षित व सुगम वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस

नैमिषारण्य धाम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की रणनीति तैयार की जा रही है। बैठक में सूचना एवं मार्गदर्शन केंद्रों की स्थापना तथा डिजिटल सूचना प्रणाली विकसित करने पर चर्चा हुई। साथ ही वृक्षारोपण, जल संरक्षण और हरित क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि विकास योजनाओं के साथ-साथ नैमिषारण्य की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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