डीएम का गौशाला पर बड़ा एक्शन: सचिव निलंबित बीडीओ-सीवीओ से जवाब तलब, प्रधान को नोटिस

निरीक्षण अभियान के दूसरे चरण में चेतावनी नहीं, सीधे कार्रवाई, मौके पर ही जिम्मेदारों पर गिरी गाज

पायनियर संवाददाता। सीतापुर

जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. का निरीक्षण अभियान अब चेतावनी के दौर से निकलकर सीधे कार्रवाई के चरण में पहुंच गया है। दूसरे चरण के निरीक्षणों में डीएम अब केवल कमियां गिनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मौके पर ही जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के आदेश दे रहे हैं। मंगलवार को विकास खंड सिधौली की ग्राम पंचायत कसावां स्थित अस्थायी गौआश्रय स्थल में भारी अव्यवस्थाएं मिलने पर डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए ग्राम विकास अधिकारी को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दे दिए। निरीक्षण के दौरान गौशाला में गौवंशों के लिए पीने के पानी, बैठने की समुचित व्यवस्था और साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब मिली।

कई पशु कमजोर हालत में पाए गए। व्यवस्थाओं की बदहाली देखकर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए ग्राम विकास अधिकारी की जवाबदेही तय की और तत्काल निलंबन के निर्देश जारी कर दिए। डीएम ने गौशाला के अभिलेखों और रजिस्टरों का भी गहन निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले और रिकॉर्ड में गंभीर कमियां पाई गर्इं। इस पर उन्होंने संबंधित वीओ के विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए। भूसा भंडारण कक्ष के निरीक्षण के दौरान जब जिलाधिकारी ने गौवंशों के उपचार और स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगी तो ग्राम विकास अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। साथ ही गौशाला की नियमित मॉनिटरिंग में लापरवाही बरतने पर खंड विकास अधिकारी सिधौली को स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने गौशाला में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी बारीकी से देखी। ग्राम प्रधान द्वारा अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन न करने पर उनके खिलाफ नोटिस जारी करने के आदेश दिए गए। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी की भूमिका पर भी डीएम ने सवाल खड़े किए। गौआश्रय स्थल की निगरानी में लापरवाही पाए जाने पर उन्होंने सीवीओ से भी जवाब तलब करने और स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी की इस सख्त कार्रवाई से साफ संकेत मिल गया है कि जिले में सरकारी योजनाओं और गौआश्रय स्थलों में लापरवाही अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण अभियान के दूसरे चरण में डीएम का फोकस सीधे जवाबदेही तय करने और दोषियों पर तत्काल कार्रवाई करने पर नजर आ रहा है। प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई की चर्चा पूरे दिन होती रही।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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