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बीके अस्पताल में आवारा कुत्तों का आतंक, खून से सनी चादर मुंह में दबाए घूमते दिखे डॉग, मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

बीके अस्पताल में आवारा कुत्तों का आतंक, खून से सनी चादर मुंह में दबाए घूमते दिखे डॉग, मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

फरीदाबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बादशाह खान सिविल अस्पताल (बीके अस्पताल) की बदहाल व्यवस्थाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों का आतंक अब मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। गुरुवार को अस्पताल में ऐसे दृश्य सामने आए, जिन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अस्पताल परिसर में आवारा कुत्ते न सिर्फ खुलेआम घूमते नजर आए, बल्कि खून से सनी अस्पताल की चादर मुंह में दबाकर इमरजेंसी वार्ड के बाहर तक ले जाते भी दिखाई दिए।

इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मरीजों और तीमारदारों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि जब अस्पताल प्रशासन परिसर में आवारा जानवरों को रोकने में नाकाम है, तो मरीजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अस्पताल परिसर में कई आवारा कुत्ते आपस में लड़ते हुए भी दिखाई दिए। इसी दौरान कुछ कुत्ते खून से सनी चादर को नोचते नजर आए। यह दृश्य देखकर अस्पताल में मौजूद लोग घबरा गए। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की स्थिति बेहद चिंताजनक है।

विशेषज्ञों के अनुसार कुत्तों की सूंघने की क्षमता इंसानों से कई हजार गुना अधिक होती है। वे खून और शरीर से निकलने वाली गंध को दूर से पहचान सकते हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि अगर किसी घायल या कमजोर मरीज के पास ये कुत्ते पहुंच जाएं, तो बड़ा हादसा हो सकता है।

गौरतलब है कि बीते दिनों सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। उन्होंने व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे और कर्मचारियों को चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद अस्पताल की स्थिति में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला। निरीक्षण के दौरान कई कर्मचारी बिना अनुमति ड्यूटी से गायब पाए गए थे, जबकि शौचालयों और वार्डों में गंदगी की शिकायतें भी सामने आई थीं।

डॉ. जयंत आहूजा ने पहले कहा था कि कुछ कर्मचारी जानबूझकर अस्पताल की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि मौजूदा हालात को देखकर मरीजों का कहना है कि जमीनी स्तर पर अब भी कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है।

भीषण गर्मी के बीच अस्पताल में कई एसी भी खराब पड़े हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। प्रशासन की ओर से कुछ जगहों पर कूलर लगाए गए हैं, लेकिन उमस और गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।

इसी बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के संभावित दौरे की चर्चा भी तेज हो गई है। हालांकि अभी तक कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।

बीके अस्पताल की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और मरीजों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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