शहर कांग्रेस तक नहीं संभली, जिलाध्यक्ष बनने का देख रहे सपना
न शहर संभला, न कार्यकर्ता जुड़े - फिर भी जिला अध्यक्ष बनने की होड़, लखीमपुर कांग्रेस में पद का लोभ हावी

लखीमपुर-खीरी। शहर कांग्रेस कमेटी की हालत किसी से छिपी नहीं है। नगर अध्यक्ष से शहर की एक बैठक तक नहीं संभल रही है, संगठन पूरी तरह बिखरा पड़ा है, कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन जिलाध्यक्ष बनने के दावे ठोकने वालों की लाइन लगी है। ऐसे लोग कांग्रेस पार्टी को तो धोखा दे ही रहे हैं, साथ ही अपने आप को भी धोखा दे रहे हैं।
सबसे बड़ी बेईमानी तो यह है कि शहर इकाई के अध्यक्ष हैं और निघासन विधानसभा टिकट के लिए भी दावेदारी कर रखी है। आखिर पार्टी को कहां ले जाना चाहते हैं? एक तरफ शहर की जिम्मेदारी नहीं संभल रही, दूसरी तरफ विधायकी का सपना देखा जा रहा है। यह पार्टी के साथ दोहरी बेईमानी नहीं तो और क्या है?
बताया जाता है कि पिछले कई महीनों से लखीमपुर शहर कांग्रेस कमेटी ने एक भी बड़ी बैठक, कार्यकर्ता सम्मेलन या धरना-प्रदर्शन नहीं किया है। शहर अध्यक्ष पूरी तरह निष्क्रिय हैं। संगठन के नाम पर सिर्फ व्हाट्सएप ग्रुप और फोटो सेशन तक ही सक्रियता दिखाई देती है। जमीनी स्तर पर कांग्रेस का कोई भी कार्यक्रम दिखाई नहीं देता।
हैरानी की बात तो यह है कि जो लोग शहर की कमान नहीं संभाल पा रहे, वही लोग अब जिलाध्यक्ष बनने और निघासन से विधायक बनने का सपना देख रहे हैं और लखनऊ से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शहर का संगठन ही नहीं संभल रहा तो पूरा जिला और विधानसभा कैसे संभलेगी?
कार्यकर्ताओं का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और भाजपा लगातार संगठन को मजबूत कर रही है, वहीं कांग्रेस में पद और टिकट की लड़ाई चल रही है। अगर यही हाल रहा तो निघासन तो दूर, पूरे जिले में कांग्रेस की नैया पार लगना नामुमकिन हो जाएगी।
पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं में इसको लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि कांग्रेस आलाकमान को चाहिए कि जमीनी हकीकत देखे और परखें। जो व्यक्ति एक पद की जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहा, वह दो-दो पदों पर आंख गड़ाए बैठा है। ऐसे लोगों को पद देने से पार्टी को और नुकसान होगा।



