नियमित जांच से समय पर हो सकती है मधुमेह और हृदय रोगों की पहचान

एम्स ऋषिकेश में सीडीएस सम्मेलन का समापन, मोटापे, किडनी और डायबिटीज के आधुनिक उपचार पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
रजनी गोयल। ऋषिकेश
एम्स ऋषिकेश में कार्डियो डायबेटिक सोसाइटी (सीडीएस) के वार्षिक सम्मेलन के अंतिम दिन विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मधुमेह, हृदय रोग और मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों पर व्यापक मंथन किया। विशेषज्ञों ने कहा कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच से बीमारियों की समय रहते पहचान कर गंभीर जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है। सम्मेलन में गंभीर संक्रमण, सेप्सिस, एंटीबायोटिक प्रतिरोध, वेंटिलेटर से मरीजों को हटाने में आने वाली कठिनाइयों तथा हृदय और किडनी के आपसी संबंधों पर चर्चा हुई।
आयोजन अध्यक्ष एवं एम्स के मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने कहा कि डायबिटीज वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती है। यह शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करने के साथ अन्य बीमारियों की गंभीरता भी बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों ने मोटापे को दीर्घकालिक बीमारी मानते हुए इसके आधुनिक उपचार और नई पीढ़ी की दवाओं पर भी विचार साझा किए। सम्मेलन में देशभर से आए चिकित्सकों ने शोध प्रस्तुतियों के साथ उपचार संबंधी अनुभव साझा किए। हृदय विफलता, किडनी प्रत्यारोपण के बाद मधुमेह रोगियों की देखभाल और बुजुर्गों में शुगर नियंत्रण जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे।
पोस्टर एवं मौखिक शोध पत्र प्रस्तुतियों में डॉ. तहजीन, डॉ. सिद्धांत, डॉ. अभिजीत, डॉ. कोमल, डॉ. गगन, डॉ. संगप्पा, डॉ. परिधि और डॉ. खुशबू विजेता रहे। पीजी क्विज में डॉ. गगन दलाल और डॉ. देवांग अग्रवाल की टीम ने बाजी मारी, जबकि डॉ. प्रदीप राउत और डॉ. गगन हरनाथ उपविजेता रहे। सम्मेलन में मेडिसिन विभाग के डॉ. वेंकटेश पाई, डॉ. मुकेश बैरवा, डॉ. पी.के. पांडा, डॉ. दरब सिंह और डॉ. अखिलेश कुमार सहित अनेक विशेषज्ञ एवं फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे।



