नारद की तपस्या से डोला इंद्र का सिंहासन, विश्वमोहिनी स्वयंवर में हुआ श्राप का प्रसंग
-कैराना में रामलीला महोत्सव का शुभारंभ, नारद लीला के मंचन ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

कैराना। नगर में श्रीरामलीला महोत्सव का रविवार को गौशाला भवन में भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि एमएलसी चौधरी वीरेंद्र सिंह, अनिल चौहान और प्रमोद सैनी अट्टा ने दीप प्रज्ज्वलित कर रामलीला का शुभारंभ किया। पहले दिन नारद लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने नारद मुनि की तपस्या, इंद्र के सिंहासन डोलने और विश्वमोहिनी के स्वयंवर की कथा का प्रभावी मंचन कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। मंचन में दिखाया गया कि नारद मुनि चारों लोकों का भ्रमण करते हुए हिमगिरी पर्वत पर पहुंचे। पर्वत की शांत और रमणीय वादियों को देखकर उन्होंने वहीं तपस्या करने का निर्णय लिया। नारद मुनि ध्यानमग्न होकर समाधि में बैठ गए। उनकी कठोर तपस्या की जानकारी जब स्वर्ग के राजा इंद्र को हुई तो वह चिंतित हो गए। उन्हें लगा कि नारद मुनि की तपस्या से उनका सिंहासन संकट में पड़ सकता है। इंद्र ने नारद मुनि की तपस्या भंग करने के लिए कामदेव और रंभा समेत अप्सराओं को भेजा, लेकिन उनके सभी प्रयास विफल रहे। तपस्या भंग न होने पर कामदेव ने नारद मुनि से क्षमा मांगी। इसके बाद नारद मुनि अपनी तपस्या की सफलता का वृत्तांत भगवान शिव को सुनाने कैलाश पहुंचे। इसके बाद कथा विश्वमोहिनी स्वयंवर की ओर बढ़ी। राजा शीलनिधि ने अपनी पुत्री विश्वमोहिनी के स्वयंवर की घोषणा कराई। नारद मुनि भी स्वयंवर में पहुंचे। उन्होंने विश्वमोहिनी का हाथ देखकर उसे अत्यंत भाग्यशाली बताया। स्वयंवर में नारद मुनि ने विश्वमोहिनी को पाने की इच्छा जताई, लेकिन विश्वमोहिनी ने भगवान विष्णु को वरमाला पहना दी। इससे नारद मुनि क्रोधित हो गए और भगवान विष्णु को पत्नी वियोग का श्राप दे दिया। उन्होंने शिवगणों को भी श्राप दिया। कथा के अनुसार नारद मुनि ने कहा कि वानर ही आगे चलकर भगवान विष्णु के अवतार के कार्य में सहायक होंगे। इस प्रसंग के मंचन ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। रामलीला स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए किला गेट चौकी प्रभारी राजकुमार बघेल के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा। नगर पालिका की ओर से भी विशेष सफाई व्यवस्था कराई गई और स्थल के आसपास चूने का छिड़काव कराया गया।



