कागजों में गुलाबी है विकास, जमीन पर कीचड़ में फंसा है लालापुरवा का खड़ंजा - 15 साल से नहीं बदली तस्वीर
निघासन में 15 साल से बदहाल खड़ंजा, ग्रामीणों में आक्रोश - बोले, अब नहीं सुधरा तो करेंगे चुनाव बहिष्कार

निघासन-खीरी। कागजों में भले ही इस खड़ंजे को दुरुस्त और विकास के गुलाबी दावों में चमकता दिखाया जाता हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मौके पर कीचड़, गड्ढे और उखड़ी हुई र्इंटें हकीकत बयां कर रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में कई बार मरम्मत दिखा दी गई, पर धरातल पर 15 साल से र्इंट तक नहीं लगी। इसी कागजी विकास की वजह से बच्चे आज भी कीचड़ में फिसलकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
निघासन ब्लॉक के लालापुरवा गांव में 15 साल से एक खड़ंजा बदहाली का पर्याय बना हुआ है। बरसात में कीचड़ में तब्दील हो जाने वाले इस रास्ते से रोज सैकड़ों ग्रामीण और तीन विद्यालयों के बच्चे जान जोखिम में डालकर गुजरते हैं, लेकिन शिकायतों के बाद भी जिम्मेदारों ने आज तक सुध नहीं ली।
ब्लॉक निघासन के अंतर्गत ग्राम पंचायत लालापुर के मजरा लालापुरवा में खड़ंजे की बदहाली ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब 15 वर्षों से यह खड़ंजा अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है, लेकिन आज तक इसकी सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार सामने नहीं आया।
हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से स्कूली बच्चे भी प्रतिदिन आवागमन करते हैं। गांव में एक प्राथमिक विद्यालय और दो निजी विद्यालय संचालित हैं, जिनमें पढ़ने वाले बच्चों को भी इसी बदहाल रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से रास्ते की हालत खराब होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों और ग्राम प्रधान का ध्यान इस ओर नहीं गया। सबसे अधिक दिक्कत स्कूली बच्चों को होती है, जिन्हें प्रतिदिन इसी रास्ते से अपने विद्यालय पहुंचना पड़ता है। कई बार बच्चे फिसलकर गिर भी जाते हैं।
विडंबना यह है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही ये दावे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए खड़ंजे की मरम्मत अथवा नए निर्माण की दिशा में जल्द कदम उठाएंगे।



